महाराजगंज: आंगनबाड़ी भर्ती में ‘खेला’, डीपीओ और सीडीपीओ के संरक्षण में धन उगाही का आरोप

सिसवा और निचलौल ब्लॉक में नियुक्ति के नाम पर अवैध वसूली का सिंडिकेट सक्रिय;

नेशनल मानवाधिकार इकाई ने जिलाधिकारी से की शिकायत

महाराजगंज। जनपद के निचलौल और सिसवा ब्लॉक में आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। नेशनल मानवाधिकार जिला इकाई ने जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर गंभीर आरोप लगाए हैं कि जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) और सीडीपीओ की मिलीभगत से अपात्रों को लाभ पहुँचाने और अभ्यर्थियों से धन उगाही का खेल चल रहा है।

 सिंडिकेट के जरिए ‘सेटिंग’ का खेल

शिकायती पत्र के अनुसार, विभाग के भीतर एक मजबूत सिंडिकेट काम कर रहा है। आरोप है कि ब्लॉक कोऑर्डिनेटर अमन गोंड और उनके कुछ सहयोगी, विभागीय अधिकारियों के संरक्षण में ऑनलाइन आवेदनों की कॉपियां निकालकर आवेदकों को फोन कर रहे हैं। इन अभ्यर्थियों को विकास भवन बुलाकर रसूखदार लोगों की मौजूदगी में ‘सत्यापन’ के नाम पर सौदेबाजी की जा रही है।

 इन नामों पर उठे सवाल

शिकायत में मुख्य रूप से तीन लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।

*अमन गोंड (ब्लॉक कोऑर्डिनेटर):* जिनकी माता स्वयं आंगनबाड़ी पद पर कार्यरत हैं।

*बृजेश चौधरी:* जिनकी पत्नी ग्राम सभा कैमी में कार्यरत हैं।यह वही व्यक्ति हैं जब भी चयन प्रक्रिया शुरू होता हैं जिला कार्यक्रम अधिकारी के आसपास घूमता नजर आता हैं।बृजेश चौधरी लोगो से यह भी कहता हैं हमारा साहब से अच्छा पकड़ हैं जो हम चाहेंगे वही होगा।

*ममता सिंह (आंगनबाड़ी, पिपरिया):* आरोप है कि यह अपना केंद्र छोड़कर निचलौल व सिसवा कार्यालयों में बैठकर इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रही हैं।

*नियम ताक पर, मेरिट की अनदेखी का डर।*

मानवाधिकार इकाई का कहना है कि सत्यापन प्रक्रिया के दौरान ये बाहरी व्यक्ति अधिकारियों के साथ बैठकर पूरी प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं। इससे योग्य और पात्र अभ्यर्थियों में भारी रोष है। डर सता रहा है कि पैसों के दम पर मेरिट को दरकिनार कर अपात्रों की नियुक्तियां कर दी जाएंगी।

> “हमने जिलाधिकारी महोदय से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि इन बिचौलियों के कॉल रिकॉर्ड और कार्यालय की उपस्थिति जांची जाए, तो भ्रष्टाचार की परतें खुल जाएंगी। हमारी मांग है कि नियुक्ति केवल पारदर्शिता के साथ मेरिट के आधार पर हो।”

> — प्रतिनिधि, नेशनल मानवाधिकार इकाई (महाराजगंज)

 

अब देखना यह है कि प्रशासन इन रसूखदार बिचौलियों और जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करता है या गरीब पात्र अभ्यर्थी इस भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएंगे।

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