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    मौत से पहले फरसा वाले बाबा की कहानी,शिष्यों ने बताई कहानी

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    शुक्रवार देर रात को करीब एक बजे फरसा वाले बाबा ने समर्थकों के साथ राजस्थान बार्डर के नंदगांव-कामां मार्ग पर वाहनों की तलाशी ली। इसका वीडियो भी इंटरनेट मीडिया में प्रसारित हो गया। तीन घंटे बाद हरियाणा बार्डर में उनकी मृत्यु हो गई।

    रात के घने कोहरे में एक दर्जन गोरक्षकों के साथ दिखे बाबा

    शुक्रवार रात करीब डेढ़ बजे रोजाना की तरह फरसा वाले बाबा चंद्रशेखर दास गो रक्षक दल के साथ कोसीकलां व कामां रोड पर स्थित नंदगांव बॉर्डर पर वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इस दौरान ईद को लेकर चंद्रशेखर बाबा पूर्व से ही सतर्क थे। घने कोहरे में बाबा अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़े थे।

    तीन घंटे बाद हादसे में हो गई मृत्यु

    बाबा का वीडियो इंटरनेट मीडिया में प्रसारित हुआ है। इस दौरान वह बोल रहे है कि कान्हा की गायों की रक्षा करना मेरा कर्तव्य है। अंधेरी रात में ही गोतस्कर गोवंशी को ले जाते है।

    अगर इस जग में आए है तो रोटी राम नहीं बनना, कुछ तो करना चाहिए। इसलिए तो फरसा वाले बाबा के नाम से गोतस्कर कांपते है। यहां के बाद बाबा को आगरा-दिल्ली मार्ग पर कंटेनर में गोवंशी को लेकर जाने की सूचना मिली थी। इस पर वह छाता हाईवे पहुंचे थे।

    शिष्य हरिओम ने लगाया आरोप

    बाबा के शिष्य हरिओम ने आरोप लगाते हुए बताया कि फरसा वाले बाबा चंद्रशेखर दास को कई बार फोन पर गोतस्करों ने जान से मारने की धमकी दी है। इस दौरान ईंद को लेकर भी पूर्व में उन्हें धमकी मिली, लेकिन धमकियों से बेखौफ बाबा गोतस्करों की तलाश में घूमते थे।

    INPUT -ANANYA MISHRA 

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