सब्जियों की पौध तैयार करने का हब बन रहा बस्ती

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बस्ती। उद्यान विभाग की ओर से संचालित इंडो-इस्राइल साझा कृषि परियोजना अब जिले की पहचान बनने को आतुर है। करीब 10 लाख पौध प्रति वर्ष तैयार करने की क्षमता से लैस हाईटेक नर्सरी प्रदेश के चार मंडलों के किसानों की मांग पूरी कर रहा है। यहां किसानों के मन पसंद प्रजाति के बीज से भी पौध तैयार की जाती है।
जानकारी के अनुसार, इंडो-इस्राइल साझा कृषि परियोजना जिले में वर्ष 2018 में स्थापित हुई है। उद्यान विभाग के बंजरिया परिसर में स्थापित यह परियोजना प्रदेश के 16 जिलों के किसानों को लता वर्गीय सब्जियों व फलों की पौध उपलब्ध कराता है। हाईटेक नर्सरी में तैयार किए जा रहे पौध रोग-व्याधि रहित होती है। यही वजह है कि यहां के पौधे किसानों को खूब पसंद आ रहे हैं।


जायद सीजन में अब तक करीब 36 किसानों ने दो लाख से अधिक पौध तैयार कराए हैं। मिल्कीपुर (अयोध्या) के किसान राजाराम यादव, खलीलाबाद (संतकबीर नगर) के अनूप यादव, रुस्तमपुर (गोरखपुर) के सर्वेश सिंह, मोतीपुर (बलरामपुर) के अनिरुद्ध प्रसाद वर्मा और पेंदा (बस्ती) के रामप्रकाश सिंह 20 से 50 हजार पौध तैयार करा चुके हैं।
इंडो-इस्राइल परियोजना के तहत स्थापित हाईटेक नर्सरी की पौध बस्ती सहित गोरखपुर, देवीपाटन व अयोध्या मंडल के किसान लेने आते हैं। परियोजना के प्रभारी अधिकारी अनीश श्रीवास्तव ने बताया कि बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज, कुशीनगर, अयोध्या, आंबेडकरनगर, बाराबंकी, अमेठी, सुल्तानपुर, गाेंडा, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती तक के किसान यहां आते हैं। हाईटेक नर्सरी से लता वर्गीय पौध के लिए विभाग किसानों से एक से दो रुपये ही लेता है। प्रभारी अधिकारी ने बताया कि यदि किसान अपना बीज देकर पौध तैयार कराते हैं तो उनसे एक रुपये प्रति पौध लिए जाते हैं। यदि किसान विभाग के बीज से तैयार पौध लेते हैं तो उनसे दो रुपये प्रति पौध लिए जाते हैं।

हाईटेक नर्सरी में डेढ़ दर्जन से अधिक सब्जियों की पौध
हाईटेक नर्सरी में उद्यान विभाग राष्ट्रीय बीज अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र (एनएसआरटीसी) से बीज मंगाकर पौध तैयार करता है। यही बीज उन्नतशील किस्म के होते हैं। प्रभारी अधिकारी के अनुसार, नर्सरी में तीन प्रकार के बैगन गोल, लंबा व सफेद के पौधे तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा पतली मिर्च, टमाटर, लौकी, नेनुआ, करेला, लोबिया, कद्दू, भिंडी, खीरा, तरोई, तरबूज, खरबूज आदि के पौधे तैयार किए जाते हैं।