सांप के जहर से नशा! आखिर ये क्या है बला, जिसके मजे ले रहा था Elvish Yadav, जानें सब कुछ

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Snake Venom: देश में नशा करने का एक और तरीका ट्रेंड करने लगा है, जिसे सांप के जहर का नशा कहते हैं। आखिर यह नशा है क्या और यह कितना खतरनाक है?

What is Snake Venom How Much It Dangerous: हेरोइन, कोकीन, चिट्टा, MDMA, मॉर्फिन का नशा करते लोग देखे होंगे, लेकिन अब देश में नशा करने का एक और तरीका ट्रेंड करने लगा है, जिसे सांप के जहर का नशा कहते हैं। ऐसा नशा करने से जुड़ा एक मामला सामने आया है। देश की राजधानी दिल्ली से नोएडा में बिग बॉस ओटीटी-2 के विनर एल्विश यादव के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। उन पर अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक रेव पार्टी करने और उसमें सांप के जहर का नशा करने का आरोप लगा है। नोएडा पुलिस और वन विभाग की टीम ने 5 सपेरे पकड़े थे, जिनसे 5 कोबरा और कई प्रकार के जहर मिले। सपेरों ने पूछताछ में बताया कि वे एल्विश यादव को स्नेक बाइट सप्लाई करते थे। इस खुलासे ने पूरे देश में सनसनी फैला दी है। वहीं चर्चा का एक टॉपिक सांप के जहर का नशा भी दे दिया है। सांप वैसे ही लोगों में दहशत का माहौल पैदा करते हैं। अब उनके जहर का नशा, सोचकर ही सिहरन-सी पैदा हो जाती है। आखिर यह नशा है क्या? क्या यह खतरनाक नहीं, क्योंकि सांप को जान ले लेते हैं, आइए इस बारे में विस्तार से बात करते हैं…

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हजारों सालों से किया जा रहा सांप के जहर का इस्तेमाल

दुनियाभर में एक लाख से अधिक जानवरों के जहर मिल जाएंगे। जानवरों के जहर एंजाइमी और गैर-एंजाइमी दोनों तरह के यौगिकों के जटिल मिश्रण होते हैं। जहर सांप, मछली, कीड़े और मकड़ियों, तारामछली और समुद्री अर्चिन, समुद्री एनीमोन, जेलीफ़िश और मूंगा जैसे सरीसृपों के होते हैं। जहर जानवारों की विष ग्रंथियों से निकलते हैं। सांप के जहर का इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में हजारों वर्षों से किया जाता रहा है। हज़ारों साल पहले, चेचक और कुष्ठ रोग के इलाज और घावों को भरने के लिए जानवरों का जहर इस्तेमाल होता था। इसमें सांप का जहर भी शामिल है। पहली शताब्दी ईस्वी में, थेरिएक नामक पदार्थ आयुर्वेद विशेषज्ञों ने बनाया था किया गया था, जिसमें सांप के जहर का मिश्रण था। इसका उपयोग 18वीं शताब्दी तक जारी रहा। इसके बाद अल्बर्ट कैलमेट नामक विशेषज्ञ ने जानवरों को जहर की छोटी खुराक का इंजेक्शन देकर एंटीवेनम तैयार करने की विधि खोजी।

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कैंसर-एड्स जैसी बीमारियों का इलाज सांपों का जहर

दुनिया में कोबरा जहर सबसे शक्तिशाली एनाल्जेसिक में से एक है। हालांकि विशेषज्ञ सांप के जहर का इस्तेमान एंटीवेनम के तौर पर करते हैं। कोबरा के जहर से कई दवाइयां बनती हैं। सांप के जहर में एक प्रोटीन पाया जाता है, जिसका इस्तेमाल दिल का दौरा, स्ट्रोक, अल्जाइमर, ब्रेस्ट कैंसर और पार्किंसन जैसी बीमारियों की दवाइयां बनाने में किया जाता है। कुछ सांपों के जहर जो ब्लड प्रेशर और ब्लड क्लॉटिंग को कंट्रोल करने के लिए भी इस्तेमाल होते हैं। कैंसर की बीमारी का इलाज करने में और दवाइयां बनाने में भी सांप के जहर का इस्तेमाल होता है। विशेष परिस्थिति में एड्स के इलाज में भी इसका उपयोग किया जाता है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जहर के जानकार डॉक्टर बताते हैं कि जराराका पिट वाइपर सांप के ज़हर से बनी दवाओं ने जितने इंसानों की जानें बचाई हैं, उतनी किसी और जानवर ने नहीं आज तक नहीं बचाई, लेकिन सांप या कोबरा के जहर से तभी बच पाएंगे, जब इसे एंटी वेनम के तौर पर इस्तेमाल करेंगे। नहीं तो कोबरा दुनिया का सबसे जहरीला सांप है और इसका डसा पानी भी नहीं मांगता।

 

 

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आखिर कैसे किया जाता सांप के जहर का नशा?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कोबरा के जहर का नशा दुनिया का सबसे बड़ा नशा है। पूरी दुनिया में कोबरा के जहर से नशा करने का ट्रेंड बढ़ने लगा है। इंडिया में यह ट्रेंड जोर पकड़ने लगा है, जिसके कई उदाहरण सामने आ चुके हैं। सांपों और कोबरा की तस्करी के मामले और तस्करी करने वालों का पकड़ा जाना इसका उदाहरण है। साल 2017 में बिहार से 70 करोड़ रुपये का कोबरा का जहर मिल चुका है। 2018 में PGIMR चंडीगढ़ के डॉक्टरों ने राजस्थान के 2 युवकों पर रिसर्च की थी। उन लड़कों ने डॉक्टरों को बताया था कि कोबरा के जहर की महक आकर्षित करती है और उस जहर का नशा करने के बाद वे मदहोश हो जाते हैं। यही नहीं वे कोबरा सांप को अपनी जीभ पर डसवाते हैं। डंक लगने से एक बार झटका जरूर लगता है, लेकिन इसके बाद वे एक घंटे के लिए खो जाते थे और उसमें जो आनंद मिलता था, बता नहीं सकते। इसकी एक बूंद की कीमत लाखों रुपये है।