नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी संघर्ष विराम के बीच कांग्रेस नेता शशि थरूर ने शांति को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा है कि यह मायने नहीं रखता कि शांति कौन स्थापित करता है, बल्कि जरूरी यह है कि क्षेत्र में स्थिरता और शांति कायम हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि शांति प्रयास असफल होते हैं, तो उसके कारणों का गंभीर विश्लेषण किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकें।
शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में थरूर ने कहा कि भारत का मूल हित शांति और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने में है। उन्होंने कहा कि भारत को केवल दर्शक बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे सक्रिय रूप से इस प्रक्रिया में शामिल होना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और पेट्रोलियम मंत्री क्षेत्र के नेताओं के साथ लगातार संपर्क में हैं, जो भारत की सक्रिय कूटनीति को दशार्ता है।
थरूर ने कहा कि भारत ‘ग्लोबल साउथ’ की एक महत्वपूर्ण आवाज है और उसे वैश्विक व क्षेत्रीय व्यवस्था के निर्माण में जिम्मेदार भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कभी-कभी भारत का योगदान प्रत्यक्ष न होकर परोक्ष या ह्लमौन कूटनीतिह्व के रूप में भी प्रभावी हो सकता है। वर्तमान समय में भारत की बढ़ती सक्रियता भविष्य में उसकी बड़ी भूमिका की संभावना को मजबूत करती है।
इस बीच, कांग्रेस ने शुक्रवार रात जारी अपने प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन और नागरिकों पर हमलों की कड़ी निंदा की है। प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्याध्यक्षों की हत्या, नागरिक अवसंरचना पर हमले और बिना वैध आधार के युद्ध छेड़ना मानवता के खिलाफ अपराध हैं। पार्टी ने जोर दिया कि किसी भी समाधान को अंतरराष्ट्रीय नियमों और संधियों के दायरे में होना चाहिए।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह राष्ट्रीय हित को राजनीतिक एजेंडे से ऊपर रखे और विदेश नीति में विशेषज्ञों की सलाह को महत्व दे। साथ ही विपक्ष को विश्वास में लेकर एक समन्वित और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया है, ताकि भारत वैश्विक स्तर पर एक विश्वसनीय और सशक्त आवाज के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत कर सके।












