नई दिल्ली। अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस भारतीय वायु सेना के साथ लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस फ्लीट को पावर देने वाले इंजन के लिए रिपेयर सेंटर बनाएगी। इस बावत अमेरिकन एयरक्राफ्ट इंजन आपूर्ति कंपनी ने सोमवार को वायु सेना के साथ समझौता किया है। देश में बनने वाली इस सुविधा का मालिकाना हक वायु सेना के पास होगा, जिससे विदेशी निर्भरता खत्म होने के साथ ही जरूरत पड़ने पर मरम्मत में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
एलसीए तेजस को जंग के लिए तैयार होने में तेजी लाने के मद्देनजर जीई एयरोस्पेस ने भारत में इंजन डिपो बनाने के लिए भारतीय वायु सेना के साथ समझौता किया है। अब एलसीए तेजस मार्क-1ए को पावर देने वाले एफ404-आईएन20 इंजन के लिए देश में ही रिपेयर और ओवरहॉल डिपो बनाया जायेगा। इससे वायु सेना को तेजस लड़ाकू विमान की आपूर्ति में हो रही देरी में तेजी से सुधार होगा, क्योंकि इससे मरम्मत के लिए विदेशी निर्भरता कम होगी और इंजन की रिपेयरिंग में लगने वाला समय भी बचेगा। यह सुविधा का निर्माण वायु सेना करेगी, लेकिन तकनीकी सहयोग जीई एयरोस्पेस देगी।
कंपनी ने कहा कि डिपो का संचालन वायु सेना के हाथों में होगा, जिसमें जीई एयरोस्पेस प्रशिक्षित कर्मचारी, उन्हें प्रशिक्षण, जरूरी स्पेयर पार्ट्स और विशेष उपकरण की सप्लाई देगी। तेजस मार्क-1ए एयरक्राफ्ट के लिए एफ404-आईएन20 इंजन का नियमित तौर पर सालभर निर्माण करना लड़ाई की तैयारी के लिए जरूरी है, इसलिए आपूर्ति चेन में देरी से फ्लीट की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। भारत में ही रिपेयर और ओवरहॉल की सुविधा सेट अप करने से लॉजिस्टिक दिक्कतों को कम करने में मदद मिलेगी।
जीई एयरोस्पेस में डिफेंस और सिस्टम्स के लिए सेल्स और बिजनेस डेवलपमेंट की उपाध्यक्ष रीटा फ्लेहर्टी ने एक बयान में कहा कि भारत के सशस्त्र बलों को सहयोग करने और तेजस फ्लीट की स्थानीय स्थिरता को बढ़ाने के लिहाज से यह साझेदारी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आने वाले डिपो फैसिलिटी के जरिए हम भारतीय वायु सेना के लिए इंजन की उपलब्धता को सहयोग करेंगे, जिससे यह पक्का होगा कि उन्हें अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अग्रणी तकनीक आसानी से मिल सके।
उन्होंने कहा कि तुरंत आॅपरेशनल फायदों के अलावा यह विकास रणनीतिक रूप से भी जरूरी है, क्योंकि यह कौशल विकास, आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण और तकनीकी ज्ञान हस्तांतरण के जरिए आत्मनिर्भरता के तहत स्वदेशी स्थिरता के लिए भारत के प्रयास को मजबूत करता है। जीई एयरोस्पेस ने कहा कि यह सहयोग जीई एयरोस्पेस और भारतीय वायु सेना के बीच चार दशक पुरानी साझेदारी का अगला कदम है।
कंपनी अभी भारतीय सेना के कई प्लेटफॉर्म को सहयोग करती है, जिसमें नौसेना के पी-8आई एयरक्राफ्ट, एमएच-60आर हेलीकॉप्टर और अपाचे हेलीकॉप्टर के इंजन के साथ-साथ फ्रंटलाइन वॉरशिप को पावर देने वाले मरीन गैस टर्बाइन शामिल हैं।












