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इजरायल और ईरान की जंग में यमन और लेबनान किसकी वजह से पिस रहे हैं?

इजरायल इन दिनों यमन और लेबनान में कहर ढा रहा है। उत्तर में लेबनान है। इजरायल का पड़ोसी है, उत्तरी सीमा से लेबनान की दूरी ज्याद नहीं है। इजरायल के किरयात शमोना और हाफा जैसे शहरों से लेबनान की पहुंच ज्यादा दूर नहीं है। यमन, इजरायल का पड़ोसी भी नहीं है। इजरायल से दूर, अरब प्रायद्वीप के दक्षिणी छोर पर यमन है।

यमन और इजरायल बीच की दूरी 2000 किलोमीटर से ज्यादा है। बीच में सऊदी अरब और लाल सागर का समुद्री हिस्सा है। इजरायल के दक्षिण में एक शहर ईलात। यहां से लेबनॉन दक्षिण दिशा में पड़ता है। दोनों देशों से इजरायल का सीधा टकराव भी नहीं है लेकिन यहां मौजूद विद्रोही, इजरायल के लिए मुश्किल हालात पैदा कर रहे हैं।

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आइए जानते हैं इन दोनों देशों से इजरायल के रिश्ते कैसे हैं-

लेबनान और इजरायल के रिश्ते कैसे हैं?

इजरायल और लेबनान के रिश्ते 1940 के दशक से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। लेबनान ने 1948 के अरब-इजरायल युद्ध में हिस्सा लिया था लेकिन 1949 में सबसे पहले शांति की इच्छा जताई थी। 1967 और 1973 के युद्धों में लेबनान की भूमिका बहुत कम रही। 1970 के दशक तक दोनों देशों की सीमा शांत थी।

1970-80 के दशक में लेबनान में गृहयुद्ध छिड़ा। इजरायल ने ईसाई मिलिशिया को समर्थन देना शुरू किया। 1982 में इजरायल ने लेबनान पर हमला किया, जिससे हजारों लोग मारे गए। 1983 में अमेरिका की मदद से शांति समझौता हुआ, लेकिन बाद में उसे रद्द कर दिया गया। इजरायल ने दक्षिण लेबनान पर कब्जा रखा, जिसके खिलाफ हिजबुल्लाह ने लड़ाई शुरू की।

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लेबनान में इजरायली हमले में मची तबाही। Photo Credit: PTI

लेबनान नहीं, हिज्बुल्लाह है इजरायल का असली दुश्मन

साल 2000 तक, इजरायल ने दक्षिण लेबनान से अपनी फौज हटा ली। 2006 में फिर इजरायल-हिजबुल्लाह युद्ध हुआ, जिसमें बड़ी तबाही हुई। 2010 के दशक में सीमा पर छोटी-मोटी झड़पें होती रहीं। 2020 में बेरूत विस्फोट के बाद इजरायल ने मदद की पेशकश की, लेकिन औपचारिक रिश्ते नहीं बने। दोनों देशों के बीच कोई राजनयिक संबंध नहीं हैं।

लेबनान को खटकता है इजरायल, वजह भी है

लेबनान इजरायल को दुश्मन देश मानता है। इजरायली पासपोर्ट वाले लोगों को इजरायल में एंट्री नहीं मिलती है। साल 2023-24 में गाजा युद्ध के दौरान हिजबुल्लाह ने इजरायल पर हमले शुरू किए। जवाब में इजरायल ने अक्टूबर 2024 में लेबनान पर छठा हमला किया। हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह समेत कई लोग मारे गए। नवंबर 2024 में अमेरिका और फ्रांस की मध्यस्थता से सीजफायर हुआ।

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हूती विद्रोहियों से लेबनान सरकार का एक धड़ा नाराज भी रहता है।

हिजबुल्लाह संभाल ले तो लेबनान हो जाएगा इजरायल का दोस्त

28 फरवरी से पहले लेबनान सरकार हिजबुल्लाह के हथियारों पर नियंत्रण करने की कोशिश कर रही थी। लेबनान में दो गुट हैं। शिया समर्थक गुट चाहते हैं कि इजरायल के खिलाफ यह संगठन मजबूती से जंग लड़े, खड़ा रहे। लेबनान की सरकार, कई बार हिजबुल्लाह को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा मानती है। 2025-26 में लेबनान के साथ शांति की कवायद होने की उम्मीद थी लेकिन हिजबुल्लाह की हमलों ने स्थितियां बिगाड़ दीं।

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इजरायल, अमेरिका और ईरान की जंग में खाड़ी के देश पिस रहे हैं। (Photo Credit: PTI)

नए हमलों में लेबनान का कितना नुकसान हुआ?

मिडिल ईस्ट मॉनिटर ने लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से कहा है कि 2 मार्च से लेकर अब तक, लेबनान में मरने वालों की संख्या 1140 पार कर चुकी है। 3 हजार से ज्यादा लोग घायल हैं। हिजबुल्लाह ने 2 मार्च को इजरायली सीमा पर हमला किया था, जिसके बाद इजरायल ने जवाबी कार्रवाई की। इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में जमीन पर सैन्य कार्रवाई भी शुरू कर दी थी। यह तनाव 28 फरवरी से ही चल रहा है। ईरान ने जवाब में इजरायल, अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। हमले दोनों तरफ से जारी है।

इजरायल और यमन के रिश्ते कैसे हैं?

इजरायल और यमन के बीच कोई राजनयिक संबंध नहीं हैं। यमन, इजरायल को दुश्मन देश मानता है। इजरायली पासपोर्ट या इजरायल के स्टैंप वाले पासपोर्ट वाले लोगों को यमन में एंट्री नहीं मिलती। 1948 में इजरायल बनने के बाद यमन ने हमेशा इजरायल की आलोचना की। यमन में यहूदी समुदाय के लोग भी बसे हुए थे। साल 1950 में एक ऑपरेशन चला, जिसमें ऑपरेशन मैजिक कार्पेट के तहत उन्हें इजरायल वापस बुला लिया गया। 1967 और 1973 के युद्धों में यमन ने इजरायल के खिलाफ विरोध जताया। उत्तर और दक्षिण यमन के एकीकरण के बाद भी यमन ने इजरायल के साथ संबंध नहीं सुधारे। यमन ने फिलिस्तीन का समर्थन किया और इजरायल की नीतियों की निंदा की। 1990 के दशक में कुछ कोशिशें हुईं लेकिन औपचारिक शांति की पहल नहीं हो पाई।

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यमन का रुख हमेशा से इजरायल के खिलाफ रहा है। Photo Credit: PTI

नए टकराव की वजह क्या है?

साल 2014 से यमन में गृहयुद्ध चल रहा है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने उत्तरी यमन पर कब्जा कर लिया है। 2023 में गाजा युद्ध शुरू होने के बाद हूतियों ने इजरायल के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। उन्होंने लाल सागर में इजरायल से जुड़े जहाजों पर भी हमले किए, जिसका असर, दुनिया के कारोबार पर भी पड़ा। इजरायल ने करारा जवाब दिया। यमन में हूती ठिकानों पर कई बार हवाई हमले किए। साल 2024-2025 में इन हमलों में दर्जनों लोग मारे गए, जिनमें हूती नेता भी शामिल थे। हूतियों ने बेन गुरियन एयरपोर्ट समेत इजरायली इलाकों को निशाना बनाया।

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आयतुल्ला खामेनेई की मौत पर गुस्से में हैं हूती समर्थक। Photo Credit: PTI

साल 2025 में गाजा सीजफायर के बाद हूती हमले रुक गए, लेकिन 2026 में इजरायल-ईरान युद्ध शुरू होने पर हूतियों ने फिर इजरायल पर मिसाइल दागे। हूती लड़ाकों का कहना है कि फिलिस्तीन के समर्थन में लड़ाई जारी रहेगी। दक्षिण यमन के कुछ गुट संयुक्त अरब अमीरात के साथ मिलकर इजरायल से बेहतर रिश्ते चाहते हैं। हूती और यमन सरकार दोनों ही इजरायल के खिलाफ हैं। इजरायल-यमन संबंध दुश्मनी और हूती हमलों से भरे रहे हैं। लाल सागर और इजरायल पर तनाव जारी है। दोनों तरफ से खूब हमले हो रहे हैं।

हूती क्या कर सकते हैं?

हूती विद्रोहियों ने इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया है। हूती अब, होर्मुज के बाद ‘बाब अल-मंडेब स्ट्रेट’ को जाम करने की फिराक में है। अगर ऐसा हुआ तो दुनिया एक और ब्लॉकेज से जूझने वाली है। यहीं से लाल सागर और हिंद महासागर आपस में जुड़ते हैं।

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