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लद्दाख बना पर्यावरण संरक्षण की मिसाल, वैज्ञानिक तरीकों से संरक्षित हो रही प्रकृति

नई दिल्ली। देश में बढ़ते जलवायु संकट(climate crisis) के बीच लद्दाख(Ladakh) ने पर्यावरण संरक्षण (environmental conservation)और सतत विकास (sustainable development)की दिशा में एक बड़ा और सराहनीय कदम उठाया है। यहां पारंपरिक उपायों से आगे बढ़ते हुए एक समग्र और वैज्ञानिक मॉडल लागू किया गया है, जिसमें भूजल नियंत्रण, ग्लेशियर निगरानी, जल संरक्षण, टिकाऊ पर्यटन और जैविक खेती को एक साथ जोड़ा गया है। यह पहल केवल पर्यावरण बचाने तक सीमित नहीं, बल्कि जल, जमीन और आजीविका के बीच संतुलन बनाने की दीर्घकालिक योजना भी है।

भूजल दोहन पर सख्ती, संकटग्रस्त क्षेत्रों में रोक

लद्दाख प्रशासन ने जल संकट की जड़ पर प्रहार करते हुए लेह जिले के अर्ध-संकटग्रस्त क्षेत्रों में भूजल दोहन पर कड़ा नियंत्रण लागू किया है। 23 दिसंबर 2024 के आदेश के तहत इन इलाकों में नए बोरवेल खोदने पर प्रभावी रोक लगा दी गई है। यह कदम भूजल स्तर को गिरने से बचाने और जल संसाधनों के संरक्षण के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

ग्लेशियरों की सैटेलाइट निगरानी से बढ़ी सुरक्षा

जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा असर हिमालयी ग्लेशियरों पर पड़ रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए इसरो की मदद से ‘जियो-स्पेशियल लद्दाख’ परियोजना शुरू की गई है। इस परियोजना के तहत रिमोट सेंसिंग तकनीक से ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की निगरानी की जा रही है। इससे ग्लेशियरों के पिघलने, झीलों के फैलाव और संभावित खतरों का समय रहते आकलन किया जा सकता है।ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी झील फटने के खतरे को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों को इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर, लेह से जोड़ने की योजना बनाई गई है। इस प्रस्ताव को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजा गया है, ताकि समय रहते चेतावनी जारी की जा सके।

जल संरक्षण ढांचे का बड़े स्तर पर विस्तार

जल संरक्षण के लिए लद्दाख में व्यापक स्तर पर संरचनाएं विकसित की गई हैं। मनरेगा और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत 800 से अधिक जल संचयन संरचनाएं बनाई गई हैं। इसके अलावा वाटरशेड मैनेजमेंट कार्यक्रम के तहत जल टैंक, तालाब, नहरें और चेक डैम तैयार किए गए हैं।लेह शहर में ‘टी-ट्रेंच’ परियोजना को फिर से शुरू किया गया है, जिससे भूजल रिचार्ज बढ़ाने और प्राकृतिक जल स्रोतों को संरक्षित करने में मदद मिलेगी। इन प्रयासों का मकसद वर्षा जल को संचित करना और सूखे जैसी परिस्थितियों से निपटना है।

टिकाऊ पर्यटन की दिशा में नई पहल

पर्यटन से बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लद्दाख प्रशासन ने नई नीतियां लागू की हैं। 2024 की सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नीति के तहत होटल और गेस्ट हाउस में विकेंद्रीकृत एसटीपी लगाने को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही 2025 के लिए नई प्रोत्साहन योजना भी तैयार की जा रही है, जिससे पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।

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