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मानसून से पहले बढ़ी चिंता:राप्ती नदी से 11 गांवों पर बाढ़-कटान का खतरा, ग्रामीण मांग रहे तटबंध निर्माण


मानसून के आगमन से पहले राप्ती नदी के किनारे बसे 11 गांवों के निवासियों की चिंता बढ़ गई है। कथरामाफी, घाटेपुरवा और वीरपुर जैसे कई गांव वर्ष 2025 की बाढ़ और कटान का दंश झेलने के बाद एक बार फिर संभावित खतरे का सामना कर रहे हैं। ग्रामीण प्रशासन से नदी की मुख्य धारा में जमी रेत और झाड़ियों की सफाई के साथ-साथ कथरामाफी से मधवापुर घाट तक लगभग पांच किलोमीटर लंबे तटबंध के निर्माण की मांग कर रहे हैं। नेपाल से निकलकर तराई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली राप्ती नदी ने वर्ष 2025 में जमुनहा तहसील क्षेत्र में व्यापक तबाही मचाई थी। उस दौरान सैकड़ों बीघा फसलें नदी में बह गई थीं, जबकि 40 बीघा से अधिक में लगे बाग भी कटान की चपेट में आ गए थे। वर्ष 2025 की बाढ़ में भिनगा-मल्हीपुर मार्ग भी नदी की तेज धारा के कारण कट गया था, जो अब तक पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो पाया है। इससे ग्रामीणों को आवागमन में जोखिम उठाना पड़ रहा है। पिछले वर्ष कटान रोकने के लिए घाटेपुरवा गांव के पास बांस के पिंजरों में बोरियां भरकर लगाई गई थीं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कथरामाफी से मधवापुर घाट तक तटबंध का निर्माण हो जाए, तो घाटेपुरवा, कथरामाफी, वीरपुर, हसनापुर, बरंगा, सलारूपुरवा, लौकिहा प्रथम, लौकिहा द्वितीय, लौकिहा तृतीय, शिकारी चौड़ा और हरिहरपुर सहित 11 गांवों का अस्तित्व सुरक्षित रह सकता है। ग्रामीण राधेश्याम यादव ने बताया कि उन्हें हर साल कटान का सामना करना पड़ता है, लेकिन इसका कोई स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। वीरपुर निवासी भल्लर के अनुसार, बाढ़ का पानी मल्हीपुर स्थित जमुनहा ब्लॉक, तहसील कार्यालय और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) तक पहुंच जाता है, जिससे मरीजों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों की यह भी मांग है कि नदी की मुख्य धारा में जमी रेत और झाड़ियों को साफ किया जाए। उनका तर्क है कि नदी की धारा में जमी रेत और झाड़ियों के कारण पानी किनारों की ओर मुड़कर कटान करता है। ग्रामीणों ने बताया कि नदी के पूर्वी छोर पर बने बांध के कारण कई गांव सुरक्षित रहते हैं, और इसी तरह की ठोस व्यवस्था इस क्षेत्र में भी आवश्यक है।

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