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उन्नाव: गोवंशों की मौत पर घिरे जिम्मेदार, फिर भी पशु चिकित्सक और डिप्टी सीवीओ सुरक्षित?

उन्नाव। सिकंदरपुर सरोसी ब्लॉक की रामनगरिया गौशाला में तीन गोवंशों के मृत मिलने के मामले में प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो गई है। मुख्य विकास अधिकारी कृतिराज ने मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) को मौके पर जांच के निर्देश दिए हैं। जानकारी के अनुसार एडीओ पंचायत को नोटिस जारी किया गया है, जबकि पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों की भूमिका को लेकर चर्चाएं जारी हैं।

प्रसिद्ध कथा वाचक अवनीश मिश्रा ने गौशाला में एक गोवंश को चरही के पास तथा दो अन्य गोवंशों को लगभग 100 मीटर दूर मृत अवस्था में पड़ा देखा था। उन्होंने गोवंशों की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए अपने सहयोगियों की मदद से मृत गोवंशों के शवों को दफन कराया। उनके अनुसार गौशाला में संरक्षित करीब एक सैकड़ा गोवंशों में से लगभग 12 गोवंश अत्यंत दयनीय हालत में मिले। आरोप है कि भूख, प्यास और बीमारी के चलते गौशाला में आए दिन गोवंशों की मौत हो रही है।

मामले में एडीओ पंचायत विनोद वर्मा ने पूर्व में बताया था कि मृत गोवंशों का पोस्टमार्टम कराकर शवों को दफन कराया गया है। हालांकि जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोटोग्राफ उपलब्ध कराने को कहा गया तो संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जा सके।

वहीं क्षेत्रीय पशु चिकित्सक डॉ. अक्षय नीरज से जानकारी मांगी गई तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में सीवीओ अथवा डिप्टी सीवीओ कार्यालय से जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इसके बाद प्रभारी डिप्टी सीवीओ सदर एवं नोडल अधिकारी डॉ. हरिओम पटेल से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विनोद कुमार से भी संपर्क नहीं हो सका। ऐसे में समाचार लिखे जाने तक संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो पाया।

बीमारी की निगरानी को लेकर उठे प्रश्न

गौशालाओं में गोवंशों के स्वास्थ्य परीक्षण, बीमारी की निगरानी और उपचार व्यवस्था की जिम्मेदारी पशु चिकित्सा विभाग की होती है। ऐसे में तीन गोवंशों की मौत के मामले में क्षेत्रीय पशु चिकित्सक और संबंधित नोडल अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

108 गोवंश संरक्षित मिलने के बाद नई चर्चा

सीवीओ द्वारा की गई जांच में 150 क्षमता वाली गौशाला में 108 गोवंश संरक्षित मिलने की बात सामने आई है। इसके बाद स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि गौशाला में संरक्षित गोवंशों की वास्तविक संख्या का रिकॉर्ड विभागीय पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों से मेल खाता है या नहीं। साथ ही यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि मृत गोवंशों की प्रविष्टियों का विभागीय अभिलेखों और पोर्टल पर किस प्रकार अद्यतन किया जाता है।

फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे गोवंशों की मौत और गौशाला की व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब मिल सकें।

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