लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को राजधानी में 9 दिवसीय रामकथा महोत्सव के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जिन लोगों के मन में भारत के प्रति आस्था और निष्ठा नहीं है, उनके लिए देश की धरती कोई धर्मशाला नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम से द्रोह करने वालों के लिए यहां जगह नहीं है।
सीएम ने समाज को आगाह किया कि ‘लव और लैंड जिहाद’ जैसी गतिविधियों के खिलाफ एकजुट होना होगा। उन्होंने कहा कि विभाजनकारी ताकतें जाति, भाषा या क्षेत्र के नाम पर लोगों को अलग करने की कोशिश करेंगी, लेकिन भारत की संत शक्ति समाज को एकजुट कर देश को आगे बढ़ाने का प्रयास करती है।
समारोह में तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने कथा वाचन किया। सीएम ने श्रद्धालुओं से कहा कि प्रभु के सान्निध्य में आने से व्यक्ति दैवीय आपदा से मुक्त रहता है और जीवन सुख-समृद्धि से बढ़ता है।
योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आंदोलन संतों के मार्गदर्शन में 491 वर्ष तक चला और 2019 में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने रामलला को जन्मभूमि का अधिकार दिया। उन्होंने कहा कि भगवान राम के आदर्श पूरे देश को जोड़ने की क्षमता रखते हैं।
साथ ही, उन्होंने संतों की साधना को राष्ट्र कल्याण और समाज हित के लिए महत्वपूर्ण बताया। गोरक्षपीठाधीश्वर ने कहा कि स्वामी रामभद्राचार्य ने भारत का पहला दिव्यांग विश्वविद्यालय स्थापित किया और वे आज भी समाज तक रामकथा पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं। सीएम ने चेतावनी दी कि जैसे रावण और उसके राक्षसों ने पहले अशांति फैलाई थी, वैसे ही नकारात्मक ताकतें आज भी समाज को तहस-नहस करने की कोशिश करेंगी।












