लोकसभा में 2 अप्रैल को डुमरियागंज से सांसद जगदम्बिका पाल ने उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर के कपिलवस्तु क्षेत्र के समग्र पर्यटन एवं विरासत विकास का मुद्दा उठाया। उन्होंने शून्यकाल के दौरान इस विषय पर अपनी बात रखी। सांसद जगदम्बिका पाल ने कहा कि सिद्धार्थनगर केवल एक प्रशासनिक क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह प्राचीन कपिलवस्तु की ऐतिहासिक भूमि है, जहाँ भगवान गौतम बुद्ध ने अपने जीवन के शुरुआती 29 वर्ष बिताए थे। सांसद ने सदन का ध्यान जनपद में स्थित 10 ऐतिहासिक सागरों (जलाशयों) की ओर आकर्षित किया। ये सागर वर्ष 1902 में निर्मित हुए थे। इनमें मर्थी, मझौली और सिसवा सागर प्रमुख हैं, जो कपिलवस्तु स्तूप से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। प्रत्येक सागर की जलधारण क्षमता 30 लाख घन फुट से अधिक बताई गई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इतनी महत्वपूर्ण विरासत होने के बावजूद इन जलाशयों का अब तक समुचित विकास नहीं हो पाया है।जगदम्बिका पाल ने सुझाव दिया कि यदि इन सागरों का वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तरीके से विकास किया जाए, तो सिद्धार्थनगर को एक बड़े इको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जा सकता है। उन्होंने यहां वॉटर स्पोर्ट्स, पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन, वुडन जोन और स्थानीय उत्पादों के विपणन के लिए ’75 जिलों का मार्ट’ जैसी योजनाएं लागू करने का प्रस्ताव रखा।सांसद ने यह भी बताया कि पिछले पांच वर्षों में कपिलवस्तु क्षेत्र में लगभग 13.5 लाख विदेशी पर्यटक आए हैं। यह आंकड़ा क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय पहचान और पर्यटन संभावनाओं को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इन सागरों के सौंदर्यीकरण और समेकित विकास से पर्यटकों की संख्या में कई गुना वृद्धि हो सकती है।नेपाल सीमा से सटा होने के कारण इस क्षेत्र का विकास पड़ोसी देशों के सामने भारत की सकारात्मक छवि को और मजबूत करेगा। अंत में, सांसद ने केंद्र सरकार से इन ऐतिहासिक सागरों के एकीकृत विकास के लिए एक विशेष योजना बनाने की मांग की, ताकि सिद्धार्थनगर को अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटन केंद्र बनाया जा सके।
लोकसभा में सिद्धार्थनगर के पर्यटन विकास का मुद्दा उठा:सांसद जगदम्बिका पाल ने कपिलवस्तु क्षेत्र के विकास की मांग की
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