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गलगोटिया यूनिवर्सिटी की करतूत पर संसद में उठे सवाल, रोबो डॉग पर चुप सरकार

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान सामने आए रोबो डॉग विवाद को लेकर संसद में DMK के सांसद केई प्रकाश ने सवाल पूछे। पूछे गए सवालों पर सरकार का जवाब अब नए सवाल खड़े कर रहा है। लोकसभा में पूछे गए तारांकित प्रश्न संख्या 370 में साफ तौर से रोबो डॉग से जुड़े विवाद, उसकी सत्यता और जिम्मेदारी तय करने जैसे मुद्दे उठाए गए थे, लेकिन सरकार के आधिकारिक जवाब में इन अहम सवालों को सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया। इसके बजाय AI मिशन और भारत की तकनीकी उपलब्धियों का लंबा विवरण दिया गया।

संसद में दिए गए जवाब के अनुसार, रोबो डॉग विवाद का जिक्र केवल एक पंक्ति में किया गया। जिसमें बताया गया कि एक प्रदर्शक गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने रोबोटिक उत्पाद को लेकर भ्रामक दावा किया, जिसके बाद उसे एक्सपो से हटा दिया गया। हालांकि, सवाल में उठाए गए मुख्य बिंदु जैसे उत्पाद की सत्यता की जांच, जिम्मेदारी तय करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम जैसे मुद्दों पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

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सरकार ने यूथ कांग्रेस विवाद का किया जिक्र

सरकार के जवाब में एक और चौंकाने वाली बात यह रही कि भारतीय युवा कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन और उस पर दर्ज FIR का चार पंक्तियों में विस्तृत उल्लेख किया गया। जबकि संसद में पूछे गए सवाल में इस विषय का कोई जिक्र नहीं था।

सरकार के जवाब में कहा, ‘भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के लिए समूह ने शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में AI इम्पैक्ट समिट स्थल पर एक प्रदर्शनी हॉल में शर्ट उतारकर विरोध प्रदर्शन किया।’ जवाब में आगे कहा गया कि पुलिस ने आपराधिक साजिश, एक लोक सेवक को चोट पुहंचाने, गैरकानूनी तरीके से एकत्र होने और सामान्य इरादे का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज की।

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जवाब में सवालों से भटकती सरकार

संसद में पूछे गए प्रश्नों का केंद्र रोबो डॉग विवाद था लेकिन सरकार ने अपने जवाब का बड़ा हिस्सा ‘इंडिया AI मिशन’ और देश की AI क्षमताओं के प्रचार में लगा दिया। जवाब में 10,000 करोड़ रुपये के AI मिशन, 38,000 GPU उपलब्ध कराने, 12 बड़े भाषा मॉडल के विकास और भारत के वैश्विक AI नेतृत्व जैसे आंकड़े पेश किए गए।

हालांकि ये आंकड़े तकनीकी प्रगति को दर्शाते हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब संसद में विशेष रूप से एक विवाद पर जवाब मांगा गया था तो उस पर ठोस जानकारी देने के बजाय उपलब्धियों का हवाला क्यों दिया गया?

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