क्षेत्र के प्राचीन रामरेखा मंदिर पर 31 मार्च यानी मंगलवार को पौराणिक रामरेखा मेले का आयोजन होगा। यह मेला सदियों से परंपरागत रूप से आयोजित होता आ रहा है। मंदिर के पुजारी महंत दयाशंकर दास महाराज ने बताया कि हर वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह मेला लगता है। मेले को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। दूर-दराज से झूला संचालक पहुंच चुके हैं और बच्चों के लिए झूले लगाने का काम शुरू हो गया है। छावनी अमोढ़ा, रूपगढ़, पूरे हेमराज समेत दर्जनों गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मेले में पहुंचते हैं। श्रद्धालु यहां राम दरबार के दर्शन कर रामरेखा नदी के किनारे लगे मेले में खरीदारी का आनंद लेते हैं। स्थानीय प्रशासन भी मेले को लेकर सतर्क है और सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। मंदिर के व्यवस्थापक गोपालजी सोनी ने बताया कि यह स्थान रामयुग से जुड़ा हुआ है। मान्यता के अनुसार त्रेतायुग में सीता स्वयंवर के बाद जनकपुर से अयोध्या लौटते समय भगवान राम, माता सीता और उनके भाईयों ने यहां रात्रि विश्राम किया था। इसी दौरान जब माता सीता को जल की आवश्यकता हुई, तब भगवान राम ने बाण से भूमि पर एक रेखा खींची, जिससे जलधारा फूट पड़ी। तभी से इस नदी को रामरेखा नदी और मंदिर को रामरेखा आश्रम के नाम से जाना जाता है।
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रामरेखा मंदिर पर 31 मार्च को लगेगा मेला:झूले और दुकानों से सजने लगा मेला परिसर, रामयुग से जुड़ी मान्यता
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