अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के निदेशक जीत अदाणी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में कहा कि एआई आने वाले समय में संप्रभुता की परिभाषा बदल देगा। भारत के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि वह एआई को सिर्फ अपनाएगा या खुद विकसित कर वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करेगा।
देश को क्या करना होगा तय?
उन्होंने कहा कि देश को यह तय करना होगा कि वह इंटेलिजेंस आयात करेगा या खुद उसका निर्माण करेगा, किसी और की प्रणाली से जुड़ेगा या अपनी प्रणाली विकसित करेगा। उनके अनुसार, भारत का उदय प्रभुत्व के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक संतुलन और समावेशी तकनीकी ढांचे के निर्माण के लिए है।
संप्रभुता आधुनिक राष्ट्रवाद की बुनियादी नींव हैं
जीत अदाणी ने जोर देकर कहा कि समावेशन बिना क्षमता के कमजोरी है और क्षमता बिना संप्रभुता के विदेशी निर्भरता बन जाती है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा संप्रभुता, कंप्यूट और क्लाउड संप्रभुता व सेवाओं की संप्रभुता आधुनिक राष्ट्रवाद की बुनियादी नींव हैं और एआई को पहले भारतीय नागरिकों के लिए शक्ति बढ़ाने वाला साधन बनना चाहिए, न कि केवल मुनाफा बढ़ाने का माध्यम।
अदाणी समूह करेगा 100 अरब डॉलर का निवेश
उन्होंने यह भी घोषणा की कि अदाणी समूह देश के लिए संप्रभु और हरित ऊर्जा आधारित एआई इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म बनाने के लिए 100 अरब डॉलर का निवेश करेगा। उनके अनुसार, यह केवल डेटा सेंटर विस्तार नहीं, बल्कि 5 गीगावाट क्षमता वाले और लगभग 250 अरब डॉलर के एकीकृत ऊर्जा व कंप्यूट इकोसिस्टम की दिशा में बड़ा कदम होगा, जो भारत की ‘इंटेलिजेंस रिवोल्यूशन’ को मजबूती देगा।





























