
बस्ती जिले के कप्तानगंज क्षेत्र में चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद पारंपरिक होली मनाई गई। लोगों ने मिट्टी और गुलाल से होली खेलकर सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया। नगर पंचायत कप्तानगंज के विभिन्न वार्डों के साथ-साथ पोखरा, ऐंठी डीह, रखिया, खदरा जैसे आसपास के गांवों में सुबह से ही उत्सव का माहौल था। कप्तानगंज पोखरा स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने एकत्र होकर पहले पूजा-अर्चना की। इसके बाद पारंपरिक फगुआ गीत गाकर होली का शुभारंभ किया गया। ढोलक और मंजीरे की थाप पर गूंजते फगुआ गीतों ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय और उत्सवी वातावरण से भर दिया। ग्रामीणों ने सबसे पहले एक-दूसरे को मिट्टी लगाकर होली की शुरुआत की, जिसे एक पुरानी परंपरा का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद गुलाल और रंगों से होली खेली गई। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने आपसी प्रेम और भाईचारे के साथ एक-दूसरे को रंग लगाया और गले मिलकर शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर मंदिर के महंत नागा बृजेश दास ने उपस्थित लोगों को होली की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि होली आपसी मतभेद मिटाकर प्रेम, सौहार्द और एकता का संदेश देने का पर्व है। महंत ने लोगों से अपनी पुरानी परंपराओं को जीवित रखने और सामाजिक समरसता बनाए रखने का आग्रह किया।पूरे क्षेत्र में दिनभर उल्लास का वातावरण बना रहा। इस पारंपरिक होली ने सभी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का काम किया।










































