
अमोढ़ा के किसान फागू सोनकर पिछले एक दशक से सब्जी की खेती कर रहे हैं। वे अपनी मौसमी सब्जियां स्थानीय बाजारों में बेचते हैं। उनकी खेती की खास बात यह है कि वे केवल जैविक खाद और गोबर की खाद का उपयोग करते हैं, किसी भी प्रकार के रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल नहीं करते। जैविक खादों के उपयोग के कारण क्षेत्र में उनकी सब्जियों की काफी मांग है। लोग सीधे उनके खेतों तक सब्जियां खरीदने पहुंच जाते हैं। किसान फागू साप्ताहिक बाजारों जैसे छावनी, अमोढ़ा और विशेषरगंज में भी अपनी सब्जियां स्वयं बेचते हैं। स्थानीय किसान फागू सोनकर ने बताया कि सब्जियों की खेती में मेहनत कम और मुनाफा ज्यादा होता है। उनके खेत से हर चार से आठ दिनों में ताजी सब्जियां बाजार में बिक जाती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जैविक उर्वरक और गोबर की खाद के इस्तेमाल से फसल मजबूत और रोगमुक्त रहती है। फागू सोनकर का कहना है कि पशुपालन से प्राप्त जैविक खाद फसल की गुणवत्ता बढ़ाती है। वे बीजों को पहले नर्सरी में उगाते हैं और फिर पौधों को खेत में लगाते हैं। इस विधि से कम जमीन में अधिक उत्पादन होता है, जिससे लागत कम आती है और मुनाफा बढ़ता है। वे मूली, टमाटर, गाजर, लौकी, धनिया, साग, मटर और गोभी जैसी विभिन्न सब्जियों की खेती करते हैं। इस प्रकार वे हर मौसम में ताजी सब्जियां उगाते हैं और बेचते हैं।












































