
बस्ती। शुक्रवार को भारत मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग ओबीसी मोर्चा ने जिलाधिकारी के प्रशासनिक अधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को तीन सूत्रीय ज्ञापन भेजा। इस ज्ञापन में जाति आधारित जनगणना में ओबीसी कॉलम शामिल करने, एससी, एसटी, ओबीसी के लिए सख्त यूजीसी बिल लागू करने और 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से छूट देने की मांग की गई है। ज्ञापन सौंपने के बाद भारत मुक्ति मोर्चा के पूर्वान्चल जोन प्रभारी आर.के. आरतियन, बहुजन मुक्ति पार्टी मण्डल अध्यक्ष हृदय गौतम, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य चन्द्रिका प्रसाद कन्नौजिया और भारत मुक्ति मोर्चा महिला विंग जिलाध्यक्ष सरिता भारती ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने कैबिनेट में ओबीसी की जाति आधारित जनगणना का फैसला किया था, लेकिन जनगणना नोटिफिकेशन में ओबीसी जातियों का कॉलम नहीं दिया गया है। नेताओं ने इसे ओबीसी के साथ धोखाधड़ी बताया और मांग की कि इस साल होने वाली राष्ट्रीय जनगणना में ओबीसी और जाति का कॉलम बढ़ाया जाए। उन्होंने यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि कमजोर यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन बनाना और फिर सुप्रीम कोर्ट में कमजोर पैरवी कर उस पर रोक लगवाना एससी-एसटी-ओबीसी के साथ धोखा है। उन्होंने एससी-एसटी-ओबीसी के समर्थन में सख्त यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन बनाकर लागू करने की अपील की। मोर्चा की तीसरी प्रमुख मांग 2011 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से मुक्त करने की थी। नेताओं ने कहा कि उनकी मांगों पर शीघ्र और सकारात्मक निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है, तो भारत मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन को और अधिक उग्र एवं व्यापक करेंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से राम सुमेर यादव, पूर्व लोकसभा प्रत्याशी ठाकुर प्रेम नन्दवंशी, डॉ. आर.के. आनन्द, सोनी, सुग्रीव चौधरी, चन्द्रावती देवी, अमरजीत आर्य, दीपक आर्य, हरिहर यादव, सीताराम भारती, भन्ते प्रज्ञानन्द, सुनील कन्नौजिया और भगवानदीन यादव सहित कई अन्य लोग शामिल थे।











































