
बस्ती जिले के कप्तानगंज क्षेत्र स्थित करमिया शुक्ल में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालु भक्तिभाव में डूबकर झूम उठे। कथा स्थल पर सुसज्जित पांडाल, आकर्षक झांकियां और पुष्प सज्जा की गई थी। भजन-कीर्तन की मधुर स्वर लहरियों से पूरा क्षेत्र कृष्णमय हो गया। कथा व्यास राकेश त्रिपाठी ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की पावन कथा का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि मथुरा में अत्याचारी कंस के अत्याचार चरम पर थे, तब धरती को पापों से मुक्त करने के लिए भगवान ने देवकी के गर्भ से कारागार में जन्म लिया। कथा व्यास ने आगे बताया कि आधी रात को भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की पावन बेला में, घनघोर वर्षा और कारागार के कड़े पहरे के बीच प्रभु का अवतरण हुआ। जन्म लेते ही कारागार के बंधन खुल गए और पहरेदार निद्रा में लीन हो गए। कथा के अनुसार, वसुदेव जी शिशु कृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना पार गोकुल की ओर चल पड़े। उफनती यमुना भी प्रभु के चरण स्पर्श से शांत हो गई। गोकुल पहुंचकर नंद-यशोदा के यहां प्रभु का पालन-पोषण हुआ और वहीं से उनकी बाल लीलाओं का शुभारंभ हुआ। जैसे ही कथा व्यास ने यह दिव्य प्रसंग सुनाया, पूरा पांडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु नाचते रहे और एक-दूसरे पर पुष्प वर्षा करते हुए जन्मोत्सव का आनंद मनाते रहे। आधी रात को प्रतीकात्मक जन्म आरती उतारी गई और मंगल गीतों से वातावरण भक्तिमय हो गया। कथा के मुख्य यजमान श्री राम सागर मिश्रा एवं श्रीमती रानी मिश्रा ने विधिवत पूजा-अर्चना कर कथा व्यास की आरती उतारी और आशीर्वाद प्राप्त किया। “हरि नाम संकीर्तन” के बीच महिला-पुरुष, बुजुर्ग और युवा देर रात्रि तक भावविभोर होकर कथा श्रवण करते रहे। इस अवसर पर दुर्गेश शुक्ला, सुरेन्द्र ओझा सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। आयोजन में अनुशासन, श्रद्धा और उत्साह का सुंदर समन्वय देखने को मिला। कथा के आगामी दिनों में श्रीकृष्ण की अन्य दिव्य लीलाओं का भी श्रवण कराया जाएगा, जिससे क्षेत्र में आध्यात्मिक जागरण और भक्ति भाव और अधिक प्रगाढ़ होगा।






































