
बहादुरपुर ब्लाक के पोखरा पोखरनी मार्ग पर स्थित गोयरी सम्मय माता मंदिर में नौ दिवसीय संगीतमयी श्रीराम कथा महोत्सव चल रहा है। कथावाचक गिरजेशदास जी महाराज ने भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न चारों भाइयों के नामकरण का वर्णन किया। महाराज गिरजेशदास ने भगवान श्रीराम के जन्म की प्रसिद्ध पौराणिक कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि श्रीराम का जन्म अयोध्या में राजा दशरथ और उनकी सबसे बड़ी पत्नी कौशल्या के घर हुआ था। राजा दशरथ एक धर्मपरायण और न्यायप्रिय शासक थे, जिन्होंने अपने राज्य में सुख-समृद्धि स्थापित की थी। भगवान श्रीराम के जन्म के समय अयोध्या में एक भव्य उत्सव मनाया गया था। राजा दशरथ ने अपने पुत्रों का पालन-पोषण किया और उन्हें सभी प्रकार की शिक्षा व प्रशिक्षण प्रदान किया। श्रीराम ने अपने भाइयों के साथ मिलकर पिता के राज्य में सुख और समृद्धि की स्थापना में सहयोग किया। दिगम्बर अखाड़ा चित्रकूट बैठक पोखरा पीठाधीश्वर गिरजेशदास जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम के जन्म की कथा भगवान विष्णु की महिमा को दर्शाती है। यह कथा बताती है कि भगवान विष्णु कैसे अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें संकट से बचाते हैं। यह भगवान श्रीराम के जीवन और उनके चरित्र के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी देती है। महाराज जी ने मां सम्मय माता की दिव्य झाँकी दिखाते हुए बताया कि सभी देवियाँ आदि शक्ति हैं, जो जगत के कल्याण के लिए अनेक रूपों में निवास करती हैं। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य यजमान शिव पूजन गौड़ और उनकी धर्मपत्नी गेना देवी सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन 1 मार्च 2026, रविवार को एक विशाल भंडारे के साथ होगा, जिसके लिए पूज्य महाराज ने समस्त क्षेत्रवासियों को सादर आमंत्रित किया है।

































