पीएम किसान योजना: 22वीं किस्त के वितरण में हो सकती है देरी; जानें क्या हैं मुख्य कारण

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पीएम किसान योजना
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देश के करोड़ों किसानों की बढ़ी चिंता

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-Kisan) के लाभार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आ रहा है। योजना की अगली यानी 22वीं किस्त मिलने में किसानों को कुछ और समय का इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि अब तक सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं की गई है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए किस्त के वितरण में विलंब की संभावनाएं जताई जा रही हैं।

आधिकारिक घोषणा का अभाव

मीडिया और विभिन्न संचार माध्यमों में 24 फरवरी या 28 फरवरी जैसी तारीखों की चर्चा थी, लेकिन सरकार ने अभी तक किसी भी निश्चित तिथि की पुष्टि नहीं की है। शासन की ओर से बरती जा रही इस चुप्पी के कारण किसानों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। बता दें कि 28 फरवरी 2026 तक केवाईसी (KYC) प्रक्रिया पूरी करने की समयसीमा दी गई थी, जिससे यह संकेत मिलते हैं कि लाभार्थियों की सूची को अंतिम रूप देने में समय लग सकता है।

तमिलनाडु चुनाव और आचार संहिता का असर

किस्त में देरी का एक बड़ा कारण आगामी राजनीतिक गतिविधियां भी मानी जा रही हैं। अप्रैल या मई के महीने में तमिलनाडु राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। मार्च के महीने में ही इन चुनावों की घोषणा होने की संभावना है, जिसके साथ ही ‘आचार संहिता’ (Model Code of Conduct) लागू हो जाएगी। चुनावी नियमों के चलते सरकारी योजनाओं के लाभ के वितरण पर असर पड़ सकता है, जो इस किस्त के वितरण में देरी का एक प्रमुख तकनीकी कारण बन सकता है।

बिहार एग्रीस्टैक और अन्य तकनीकी बाधाएं

बिहार जैसे राज्यों में ‘एग्रीस्टैक’ (Agri-Stack) में पंजीकरण न हो पाने वाले किसानों को भी इस योजना में शामिल करने की मंजूरी दी गई थी। विभिन्न राज्यों से प्राप्त आंकड़ों का मिलान और लाभार्थियों की पात्रता की जांच की प्रक्रिया अभी भी जारी है। जब तक सभी राज्यों का डेटा सुचारू रूप से अपडेट नहीं हो जाता, तब तक केंद्र सरकार द्वारा हफ्ता जारी करने में कठिनाई आ सकती है।

नमो शेतकरी योजना पर भी बनी है सस्पेंस

पीएम किसान योजना के साथ-साथ महाराष्ट्र सरकार की ‘नमो शेतकरी महासन्मान निधि योजना’ के अगले हफ़्ते को लेकर भी अभी तक कोई स्पष्ट अपडेट नहीं मिला है। राज्य सरकार और संबंधित मंत्रियों की ओर से इस योजना के वितरण को लेकर कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वर्तमान में जारी बजट सत्र और प्रशासनिक व्यस्तता के कारण इस योजना के लाभ में भी देरी होने की आशंका जताई जा रही है।

निष्कर्ष

फिलहाल, किसानों को यह सलाह दी जाती है कि वे किसी भी अनाधिकारिक तारीख पर भरोसा न करें और सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें। जैसे ही शासन की ओर से कोई पुख्ता जानकारी साझा की जाएगी, उसे किसानों तक तुरंत पहुँचाया जाएगा। इस योजना के माध्यम से मिलने वाली ₹2000 की राशि किसानों के लिए खेती के खर्चों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, इसलिए सभी की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

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