छत्रपति संभाजीनगर: महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में इन दिनों पशुओं में लंपी स्किन (Lumpy Skin Disease) जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। इस बीमारी के प्रसार का मुख्य कारण मक्खियां, मच्छर और गोचीड (Ticks) जैसे कीट हैं। पशुपालक अपने जानवरों के शरीर पर आने वाले फोड़े और उनकी गिरती सेहत को लेकर काफी चिंतित हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इन कीटों का नियंत्रण न केवल पशुओं के स्वास्थ्य के लिए, बल्कि घरों में रहने वाले इंसानों की सुरक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
प्रभावी कीटनाशक और उसका उपयोग
मक्खियों और मच्छरों के आतंक को खत्म करने के लिए बाजार में कई उत्पाद उपलब्ध हैं, लेकिन ‘लैम्ब्डा-साइहेलोथ्रिन 10% WP’ (Lambda-cyhalothrin 10% WP) फॉर्मूलेशन वाला कीटनाशक सबसे अधिक असरदार माना जाता है। यह पाउडर के रूप में आता है और पानी में आसानी से घुल जाता है। वीडियो में बताया गया है कि टाटा कंपनी का ‘से’ (SE) नाम का उत्पाद इसके लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, हालांकि आप इसी तकनीकी घटक (Content) वाला किसी भी कंपनी का उत्पाद ले सकते हैं। इसकी ६२.५ ग्राम की पुड़िया को १० लीटर पानी में मिलाकर घोल तैयार किया जाता है।
छिड़काव की सही विधि और सावधानी
इस कीटनाशक का छिड़काव पशुओं के गोठ (तबेले) की दीवारों और छतों पर करना चाहिए। छिड़काव करते समय यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि दवा पशुओं के चारे या पानी के बर्तन (दावनी) में न गिरे। घर के अंदर छिड़काव करते समय खाने-पीने की चीजों, बच्चों के कपड़ों और उनके खेलने की जगहों से दवा को दूर रखें। घर की बाहरी दीवारों पर इसका छिड़काव करने से मच्छर और मक्खियां अंदर प्रवेश नहीं कर पाते। एक बार छिड़काव करने के बाद इसके परिणाम लगभग २० दिनों तक प्रभावी रहते हैं।
कीटों पर दवा का असर
इस दवा की विशेषता यह है कि यह कीटों के तंत्रिका तंत्र पर सीधा हमला करती है। छिड़काव के संपर्क में आते ही मक्खियां, मच्छर और पिस्सू तुरंत मर जाते हैं। यदि कोई कीट बाद में आकर उस सतह पर बैठता है जहां छिड़काव किया गया है, तो वह भी लकवाग्रस्त (Paralyze) होकर मर जाता है। इससे न केवल वयस्क कीट खत्म होते हैं, बल्कि उनके अंडे भी नष्ट हो जाते हैं, जिससे भविष्य में इनकी संख्या बढ़ने पर रोक लगती है। यह उपाय उन किसानों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जिनके घर खेतों में हैं और जहां मच्छरों का भारी प्रकोप रहता है।
पशुओं की सुरक्षा और देखभाल
पशुपालकों के मन में अक्सर यह शंका रहती है कि दवा के छिड़काव के बाद पशुओं को तबेले में कब बांधना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, दीवारों पर छिड़काव करने के तुरंत बाद भी पशुओं को वहां बांधा जा सकता है, क्योंकि यह दवा दीवारों के संपर्क में आने वाले कीटों के लिए घातक है, पशुओं के लिए नहीं (बशर्ते वे इसे चाटें नहीं)। लंपी जैसी संक्रामक बीमारियों को रोकने के लिए तबेले की स्वच्छता और कीटमुक्त वातावरण अनिवार्य है। नियमित अंतराल पर इस तरह का प्रबंधन करने से पशु स्वस्थ रहते हैं और दूध उत्पादन में भी सुधार होता है।































