8वें वेतन आयोग में बढ़ सकती है हाउस बिल्डिंग एडवांस की सीमा, कर्मचारियों ने रखी 75 लाख रुपये तक की मांग
कर्मचारियों में 8वें वेतन आयोग को लेकर बढ़ी उम्मीदें
केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच इन दिनों 8वें वेतन आयोग को लेकर काफी चर्चा हो रही है। कर्मचारी संगठनों को उम्मीद है कि नए वेतन आयोग में उनकी कई पुरानी मांगों पर विचार किया जाएगा। खास तौर पर घर बनाने या खरीदने के लिए मिलने वाले हाउस बिल्डिंग एडवांस (एचबीए) की सीमा बढ़ाने की मांग जोर पकड़ रही है। कर्मचारियों का कहना है कि देश के बड़े शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिसके कारण मौजूदा लोन सीमा अब पर्याप्त नहीं रह गई है।
हाउस बिल्डिंग एडवांस की सीमा बढ़ाने की मांग
कर्मचारी संगठनों ने प्रस्ताव दिया है कि हाउस बिल्डिंग एडवांस की अधिकतम सीमा को बढ़ाकर 75 लाख रुपये तक कर दिया जाए। साथ ही इस लोन पर ब्याज दर को घटाकर 5 प्रतिशत करने की भी मांग की गई है। यह प्रस्ताव नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन की ओर से रखा गया है। कर्मचारियों का मानना है कि अगर सरकार इस मांग को स्वीकार करती है तो लाखों सरकारी कर्मचारियों को घर खरीदने या बनाने में बड़ी राहत मिलेगी।
वर्तमान में क्या है नियम
फिलहाल 7वें वेतन आयोग के तहत हाउस बिल्डिंग एडवांस की अधिकतम सीमा 25 लाख रुपये या फिर कर्मचारी के 34 महीने के बेसिक वेतन के बराबर तय की गई है। इसके अलावा इस लोन पर कर्मचारियों को करीब 7.5 प्रतिशत ब्याज देना पड़ता है। कर्मचारियों का कहना है कि यह सीमा आज के समय में काफी कम हो गई है, क्योंकि दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में मकानों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
नई व्यवस्था में सैलरी के आधार पर लोन की मांग
कर्मचारी संगठनों ने सुझाव दिया है कि हाउस बिल्डिंग एडवांस की सीमा कर्मचारियों के 60 महीने के वेतन के बराबर कर दी जाए। इसके अलावा लोन लेने के लिए आवश्यक सेवा अवधि को भी कम करने की मांग की गई है। अभी कर्मचारियों को इस सुविधा के लिए कम से कम 5 साल की नौकरी पूरी करनी होती है, लेकिन प्रस्ताव में इसे घटाकर 2 साल करने की बात कही गई है।
रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू
जानकारी के अनुसार 8वें वेतन आयोग ने अपना काम शुरू कर दिया है और इसकी रिपोर्ट तैयार करने में लगभग 18 महीने का समय लग सकता है। लंबे समय से कर्मचारी संगठन नए वेतन आयोग के गठन की मांग कर रहे थे। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि आयोग कर्मचारियों की आर्थिक जरूरतों और मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें कर सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। किसी भी आधिकारिक निर्णय या नीति में बदलाव के लिए संबंधित सरकारी अधिसूचना या आधिकारिक घोषणा को ही अंतिम माना जाना चाहिए।































