₹2585 MSP + ₹150 बोनस, खरीद केंद्र पर बायोमैट्रिक सत्यापन और 48 घंटे में भुगतान का दावा।

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समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद की तैयारी तेज, किसानों को बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद

अच्छी बारिश से रबी फसल को मिला फायदा

पिछले वर्ष क्षेत्र में अच्छी बारिश होने के कारण जलाशयों और बांधों में पर्याप्त पानी उपलब्ध रहा। इसका सीधा लाभ किसानों को रबी सीजन में मिला। सिंचाई के लिए पानी की कमी न होने से किसानों ने इस बार बड़े स्तर पर गेहूं की बुवाई की। पूरे मौसम में तापमान और मौसम की स्थिति भी अनुकूल बनी रही, जिससे फसल की बढ़वार अच्छी हुई है। खेतों में इस समय गेहूं की फसल पकने की स्थिति में पहुंच चुकी है और किसान कटाई की तैयारी में जुट गए हैं। किसानों का कहना है कि अगर मौसम इसी तरह सामान्य बना रहा तो मार्च के अंतिम सप्ताह से गेहूं की कटाई शुरू हो सकती है। अच्छी पैदावार की संभावना से किसानों के बीच उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।

सरकार ने शुरू की खरीद की तैयारियां

फसल कटाई शुरू होने से पहले ही सरकार ने समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद की तैयारी तेज कर दी है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके, इसके लिए जिले में छह खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर किसान अपनी गेहूं की फसल सीधे बेच सकेंगे। इस बार गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। इसके साथ ही राज्य बजट में 150 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने की घोषणा भी की गई है। यदि यह बोनस लागू होता है तो किसानों को कुल मिलाकर 2735 रुपये प्रति क्विंटल तक कीमत मिल सकती है, जो बाजार भाव से काफी बेहतर है।

बाजार भाव कम होने से किसान सरकारी खरीद की ओर

वर्तमान समय में स्थानीय मंडियों में गेहूं का बाजार भाव लगभग 2250 से 2350 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है। यह कीमत सरकारी समर्थन मूल्य से कम है, इसलिए अधिकतर किसान अपनी फसल सरकारी खरीद केंद्रों पर बेचने की योजना बना रहे हैं। इससे उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है। सरकार का भी प्रयास है कि किसानों को उनकी मेहनत का उचित लाभ मिले और खरीद प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से पूरी की जा सके।

पंजीयन और खरीद की समय सीमा

समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए किसानों का पंजीयन 1 फरवरी से शुरू हो चुका है और यह प्रक्रिया 25 जून तक जारी रहेगी। वहीं गेहूं की सरकारी खरीद 10 मार्च से शुरू होकर 30 जून तक चलेगी। जिले में कांकरोली, राज्यावास, मदारा, कुरज, कुंवारिया और नाथद्वारा में खरीद केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर किसानों के लिए छाया, पेयजल, साफ-सफाई, तौल कांटा और नमी मापक यंत्र जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

पारदर्शी प्रक्रिया और जल्दी भुगतान की व्यवस्था

इस बार खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कई डिजिटल व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। किसानों का ऑनलाइन पंजीयन किया जा रहा है और फार्मर आईडी व एग्री-स्टैक प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। पहली बार खरीद केंद्रों पर किसानों का बायोमैट्रिक सत्यापन भी किया जाएगा। जनआधार के अनुसार किसान परिवार का कोई भी वयस्क सदस्य गेहूं बेचने के लिए आ सकता है और उसका सत्यापन मशीन के माध्यम से किया जाएगा। किसानों को उनकी उपज का भुगतान 48 घंटे के भीतर पीएफएमएस प्रणाली के माध्यम से सीधे बैंक खाते में भेज दिया जाएगा। इससे भुगतान प्रक्रिया तेज और सुरक्षित बनेगी।

Disclaimer:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। समर्थन मूल्य, बोनस राशि, पंजीयन प्रक्रिया और खरीद की शर्तें समय-समय पर सरकार द्वारा बदली जा सकती हैं। इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी फसल बेचने से पहले संबंधित विभाग या आधिकारिक स्रोतों से नवीनतम जानकारी अवश्य प्राप्त करें।

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