आधार कार्ड में जन्मतिथि बदलने के नियम हुए सख्त
यूआईडीएआई ने जारी की नई एसओपी
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने आधार कार्ड में जन्मतिथि बदलने से जुड़े नियमों को लेकर नई मानक संचालन प्रक्रिया जारी की है। हाल के समय में जन्मतिथि में बार-बार बदलाव के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। नई व्यवस्था के तहत अब आधार में जन्मतिथि में संशोधन केवल विशेष परिस्थितियों में ही किया जा सकेगा। प्राधिकरण का मानना है कि किसी भी व्यक्ति की जन्मतिथि एक ही होती है, इसलिए सामान्य परिस्थितियों में इसे बदलने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। यह नया नियम 24 दिसंबर 2025 से प्रभावी कर दिया गया है।
किन परिस्थितियों में मिलेगा सुधार का मौका
यूआईडीएआई के अनुसार कई बार आधार नामांकन के समय ऑपरेटर की टाइपिंग गलती, अनुमान के आधार पर दर्ज की गई जानकारी या गलत दस्तावेज देने के कारण जन्मतिथि गलत दर्ज हो जाती है। ऐसे मामलों में सुधार की अनुमति दी जाएगी। हालांकि इसके लिए संबंधित व्यक्ति को प्रमाणित और सत्यापन योग्य दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य आधार डेटाबेस की शुद्धता और विश्वसनीयता को बनाए रखना है ताकि नागरिकों की पहचान से जुड़ी जानकारी पूरी तरह सही बनी रहे।
जन्म प्रमाण पत्र को दी गई सबसे अधिक मान्यता
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में जन्म प्रमाण पत्र को सबसे अधिक मान्य और कानूनी दस्तावेज माना गया है। यदि किसी व्यक्ति ने पहले ही जन्म प्रमाण पत्र को आधार में जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में जमा किया है, तो सामान्य परिस्थितियों में दोबारा बदलाव की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि पहले पासपोर्ट, मैट्रिक प्रमाण पत्र या अन्य दस्तावेजों के आधार पर जानकारी दर्ज की गई है, तो सही सुधार के लिए प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत करना जरूरी होगा।
बच्चों के आधार नामांकन में भी बदलाव
नई व्यवस्था के तहत बच्चों के आधार नामांकन से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य दस्तावेज होगा। वहीं पांच से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए डिजिटल रूप से सत्यापित जन्म प्रमाण पत्र स्वीकार किया जाएगा। बच्चों के मामलों में माता-पिता या कानूनी अभिभावक को घोषणा पत्र देना होगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि दी गई जानकारी सही है।
विवाह के बाद नाम और जन्मतिथि सुधार की प्रक्रिया
यदि किसी महिला ने विवाह के बाद अपना नाम बदल लिया है और उसी के साथ जन्मतिथि में भी सुधार की आवश्यकता है, तो विवाह प्रमाण पत्र या पुराने और नए नाम वाले दस्तावेजों को प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। इससे ऐसे मामलों में पहचान और जानकारी को सही तरीके से अपडेट करने में मदद मिलेगी।
गलत जानकारी देने पर हो सकती है कार्रवाई
यूआईडीएआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर गलत या फर्जी दस्तावेज देकर जन्मतिथि दर्ज कराई है, तो उस आधार नंबर को अस्थायी रूप से निष्क्रिय किया जा सकता है। हालांकि ऐसे मामलों में व्यक्ति को एक अंतिम अवसर दिया जाएगा, जिसमें वह सही दस्तावेज और शपथपत्र के साथ जन्मतिथि सुधार के लिए आवेदन कर सकता है। सभी शपथपत्र कम से कम 10 रुपये के गैर-न्यायिक स्टांप पेपर पर तैयार करने होंगे।
डिस्क्लेमर:
यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है और इसमें दी गई जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट्स और आधिकारिक दिशा-निर्देशों के आधार पर लिखी गई है। समय-समय पर नियमों में बदलाव संभव है, इसलिए किसी भी प्रकार का आवेदन करने से पहले यूआईडीएआई की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत केंद्र से नवीनतम जानकारी अवश्य प्राप्त करें।




























