मानसून 2026 और अल नीनो का खतरा: किसानों के लिए बड़ी चेतावनी, जानिए खेती पर क्या होगा असर

1
मानसून 2026 और अल नीनो
Advertisement

मानसून 2026 और अल नीनो का खतरा: किसानों के लिए बड़ी चेतावनी, जानिए खेती पर क्या होगा असर

साल 2026 में अल नीनो (El Niño) की वापसी को लेकर मौसम वैज्ञानिकों ने गंभीर चिंता जताई है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. एस.ए. पांडे के अनुसार, वर्तमान में ला नीना (La Niña) की स्थिति कमजोर पड़ रही है और प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। अनुमान है कि मध्य 2026 तक समुद्र का तापमान बढ़ने से अल नीनो विकसित होने के 50 से 60% तक आसार हैं। चूंकि भारत की 70 से 80% बारिश मानसून पर निर्भर करती है, अल नीनो का सक्रिय होना सूखे जैसी स्थिति और कम बारिश का कारण बन सकता है, जो सीधे तौर पर खेती और खाद्य सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।

अल नीनो की वापसी का सबसे बुरा असर मानसून के वितरण पर पड़ता है। इससे बारिश के दिन कम हो जाते हैं और देश के कई हिस्सों में सूखे की आशंका बढ़ जाती है। इसका सीधा प्रभाव खरीफ की फसलों और आगामी कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है। मार्च के महीने से ही भारत के कई हिस्सों में तापमान का 37 से 38 डिग्री तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि गर्मी इस बार रिकॉर्ड तोड़ सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अल नीनो के कारण वैश्विक तापमान में 0.1 से 0.2 डिग्री की अस्थायी वृद्धि हो सकती है, जिससे दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया सहित भारत में अत्यधिक गर्मी और शुष्क मौसम का सामना करना पड़ेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, जून से सितंबर के दौरान मानसून पर अल नीनो का नकारात्मक प्रभाव पड़ने की प्रबल संभावना है। वर्तमान में जो उत्तर-पश्चिमी हवाएं थोड़ी ठंडक ला रही थीं, उनकी गति कम होने वाली है, जिससे अब गर्मी और तेजी से बढ़ेगी। अल नीनो न केवल बारिश को प्रभावित करता है, बल्कि यह देश के जल स्रोतों और बिजली उत्पादन पर भी असर डालता है। ऐसे में किसानों को सलाह दी जाती है कि वे बदलते मौसम के मिजाज को देखते हुए अपनी फसल चक्र और सिंचाई प्रबंधन की योजना अभी से बनाना शुरू कर दें।

कुल मिलाकर, साल 2026 का मानसून चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। वैश्विक मौसम एजेंसियों की मॉडलिंग और पूर्वानुमानों के आधार पर यह स्पष्ट है कि मध्य 2026 के बाद अल नीनो का प्रभाव व्यापक रूप से दिखाई देगा। यह स्थिति न केवल कृषि उत्पादन को प्रभावित करेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर भी गहरा असर डालेगी। मौसम की सटीक जानकारी और विशेषज्ञों की सलाह का पालन करना ही इस आगामी संकट से बचने का सबसे प्रभावी रास्ता है।

Advertisement