मनरेगा मजदूरों के लिए नई व्यवस्था लागू: अब ई-केवाईसी और फेस ऑथेंटिकेशन अनिवार्य, NMMS ऐप से लगेगी डिजिटल हाजिरी

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मनरेगा में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई व्यवस्था लागू

श्रमिकों की पहचान के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने वाली प्रमुख सरकारी योजना Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act यानी मनरेगा में अब पारदर्शिता और श्रमिकों की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत योजना से जुड़े श्रमिकों के लिए ई-केवाईसी कराना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ वास्तविक और पात्र मजदूरों तक ही पहुंचे। इसके लिए सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि जल्द से जल्द श्रमिकों की पहचान प्रक्रिया पूरी कराई जाए।

फेस ऑथेंटिकेशन से दर्ज होगी उपस्थिति
ग्राम्य विकास विभाग के निर्देश के अनुसार अब मनरेगा के अंतर्गत काम करने वाले मजदूरों की उपस्थिति डिजिटल तरीके से दर्ज की जाएगी। इसके लिए National Mobile Monitoring System App यानी एनएमएमएस एप में फेस ऑथेंटिकेशन की सुविधा शुरू की गई है। इस नई व्यवस्था के तहत श्रमिकों को काम के दौरान अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए ऐप के माध्यम से चेहरा सत्यापित करना होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि उपस्थिति उसी व्यक्ति की दर्ज हो रही है जो वास्तव में कार्य कर रहा है। इस प्रणाली को लागू करने का मुख्य उद्देश्य फर्जी उपस्थिति और अनियमितताओं को रोकना है।

केंद्र सरकार के निर्देश पर लिया गया फैसला
यह नई व्यवस्था Ministry of Rural Development के निर्देशों के आधार पर लागू की जा रही है। मंत्रालय ने राज्यों को योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए श्रमिकों का डिजिटल सत्यापन सुनिश्चित करने को कहा है। इसी क्रम में राज्य स्तर पर अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी मनरेगा श्रमिकों की ई-केवाईसी प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी कराई जाए। यदि किसी श्रमिक की ई-केवाईसी पूरी नहीं होती है, तो उसके नाम से मास्टर रोल जारी नहीं किया जाएगा।

तकनीकी समस्या होने पर मिलेगी छूट
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी श्रमिक की ई-केवाईसी तकनीकी या अन्य वास्तविक कारणों से पूरी नहीं हो पाती है, तो इसके लिए छूट की व्यवस्था भी रखी गई है। ऐसी स्थिति में संबंधित खंड विकास अधिकारी या कार्यक्रम अधिकारी अपने स्तर से उचित निर्णय ले सकते हैं। इसका उद्देश्य यह है कि वास्तविक मजदूर केवल तकनीकी कारणों से रोजगार से वंचित न रहें।

योजना के बेहतर संचालन की दिशा में कदम
मनरेगा देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजनाओं में से एक है, जिसके माध्यम से लाखों ग्रामीण परिवारों को काम मिलता है। सरकार का मानना है कि ई-केवाईसी और फेस प्रमाणीकरण जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं से योजना की पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी। साथ ही इससे मजदूरों की सही पहचान सुनिश्चित होगी और भुगतान प्रक्रिया भी अधिक सुरक्षित और प्रभावी बन सकेगी।

डिस्क्लेमर:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी सरकारी निर्देशों और उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। योजना से संबंधित अंतिम और आधिकारिक जानकारी के लिए संबंधित सरकारी विभाग या आधिकारिक पोर्टल की जानकारी को ही मान्य माना जाना चाहिए।

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