10 साल तक अनाज सुरक्षित रखने के 3 जादुई और जैविक तरीके
गेहूं का भंडारण करते समय अक्सर घुन लगने की समस्या मेहनत की कमाई को मिट्टी में मिला देती है। घुन अनाज को अंदर ही अंदर खोखला कर देता है और जब तक हमें इसका पता चलता है, तब तक लगभग 30-40% अनाज बर्बाद हो चुका होता है। सबसे बड़ी गलती अनाज में नमी रह जाना है। यदि गेहूं को अच्छी तरह सुखाया न जाए या उसे सीधे जमीन पर नमी वाली जगह रखा जाए, तो उसमें कीड़ा लगना तय है। लेकिन बिना किसी जहरीली दवा के भी आप अपने अनाज को सालों-साल सुरक्षित रख सकते हैं।
अनाज सुरक्षित रखने का पहला और सबसे सरल जैविक तरीका है ‘तूड़ी या भूसे’ का उपयोग। गेहूं को स्टोर करने से पहले उस स्थान के तलवे (नीचे) में बारीक तूड़ी की एक परत बिछाएं। इसके बाद गेहूं को बारीक डस्ट या तूड़ी के साथ मिलाकर भरें और ऊपर से भी तूड़ी की एक मोटी परत लगा दें। यह तरीका अनाज को पूरी तरह पैक कर देता है, जिससे 10 साल तक भी घुन लगने का खतरा नहीं रहता। दूसरा तरीका है ‘नीम के ताजे पत्तों’ का प्रयोग। स्टोर करने वाली टंकी या कमरे में हर 2 फीट गेहूं के ऊपर 2 इंच मोटी नीम के पत्तों की परत लगाएं। नीम की कड़वाहट कीड़ों को पैदा होने से रोकती है।
तीसरा और सबसे प्रभावी तरीका ‘मोटे नमक’ का इस्तेमाल है। भंडारण के दौरान हर 2-3 फीट की गेहूं की लेयर पर मोटे नमक के डले (पत्थर) रखें और थोड़ा बारीक नमक ऊपर से छिड़क दें। नमक नमी को सोख लेता है और कीड़ों को पनपने नहीं देता। यह फार्मूला गोदामों और घरों, दोनों के लिए बेहद सटीक माना जाता है। ध्यान रहे कि गेहूं को कम से कम तीन-चार दिन कड़क धूप में सुखाने के बाद ही स्टोर करें और पुरानी बोरियों का इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि उनमें पहले से नमी या कीड़े हो सकते हैं।
इन जैविक विधियों को अपनाकर आप न केवल अपना अनाज बचा सकते हैं, बल्कि रसायनों के दुष्प्रभावों से भी खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं। यदि आप इन देसी नुस्खों का पालन करते हैं, तो आपका गेहूं लंबे समय तक ताजा और कीड़ा-मुक्त बना रहेगा। जहरीली दवाओं के बजाय इन सुरक्षित विकल्पों को अपनाना ही समझदारी है।

































