युद्ध के बावजूद सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट; हैरान हैं निवेशक, जानें क्या है इसके पीछे का गणित

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युद्ध के बावजूद सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट
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ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों के कारण आमतौर पर सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी की कीमतों में तेजी आती है, लेकिन वर्तमान हालात कुछ अलग नजर आ रहे हैं। ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद जहां एक ओर शेयर बाजार में गिरावट आई है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं, वहीं दूसरी ओर सोने और चांदी के दामों में उछाल के बजाय गिरावट दर्ज की जा रही है। इस अप्रत्याशित बदलाव ने दुनियाभर के निवेशकों को हैरान कर दिया है।

डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व का असर

सोने-चांदी की कीमतें न बढ़ने का एक मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना है। युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं और चूंकि कच्चे तेल का व्यापार वैश्विक स्तर पर डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की मांग बढ़ जाती है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती आना सोने के लिए नकारात्मक माना जाता है। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती को लेकर बदलती उम्मीदों ने भी निवेशकों के उत्साह को कम किया है।

मुनाफावसूली का दौर

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में पहले ही काफी तेजी आ चुकी है। जैसे ही युद्ध की खबरें आईं और कीमतों में हल्का उछाल दिखा, कई निवेशकों ने मुनाफावसूली (Profit Booking) शुरू कर दी। इस बिकवाली के कारण कीमतों में लगातार वृद्धि होने के बजाय गिरावट देखने को मिल रही है।

निवेशकों का आकलन

कोटक म्यूचुअल फंड के विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक फिलहाल इस बात का आकलन कर रहे हैं कि यह सैन्य संघर्ष कितना लंबा चलेगा और इसका भौगोलिक विस्तार कितना होगा। यदि यह संघर्ष सीमित रहता है, तो सोने की कीमतों में अचानक बहुत बड़ी तेजी आने की संभावना कम है। फिलहाल, निवेशक ‘इंतजार करो और देखो’ की नीति अपना रहे हैं, जिससे बाजार में स्थिरता के बजाय उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

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