देश के विभिन्न हिस्सों में इन दिनों रसोई गैस (LPG) को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। घरेलू और व्यावसायिक, दोनों ही क्षेत्रों में गैस सिलेंडर की भारी किल्लत देखी जा रही है। नोएडा, दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस और तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर अब आम आदमी की रसोई तक पहुंच गया है।
नए नियम और तकनीकी दिक्कतों ने बढ़ाई परेशानी
सरकार के नए नियमों के अनुसार, अब उपभोक्ताओं को दूसरा सिलेंडर केवल 25 दिनों के अंतराल के बाद ही उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि पहले यह अवधि 15 दिनों की थी। इस नियम से विशेषकर संयुक्त और बड़े परिवारों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इसके अलावा, ऑनलाइन बुकिंग में तकनीकी खराबी, ओटीपी (OTP) न मिलना और सिस्टम डाउन होने जैसी समस्याओं के कारण लोग हफ्तों से एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं। कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि डोर-टू-डोर डिलीवरी बंद होने के कारण उन्हें खुद गोदामों तक जाना पड़ रहा है।
होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री पर बुरा असर
गैस की कमी का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि होटल और रेस्टोरेंट व्यवसायों में भी हड़कंप मचा हुआ है। कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति ठप होने के कारण कई छोटे रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर हैं। कुछ संस्थानों ने तो अपने व्यंजनों के दाम तक बढ़ा दिए हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई जगहों पर सिलेंडर को लेकर लोगों के बीच हाथापाई और विवाद की खबरें भी सामने आ रही हैं।
सरकार का पक्ष और आश्वासन
इस बिगड़ती स्थिति के बीच सरकार ने स्पष्ट किया है कि कुछ क्षेत्रों में अचानक मांग बढ़ने के कारण यह अस्थाई किल्लत पैदा हुई है। सरकार ने एलपीजी उपभोक्ताओं से पैनिक न होने की अपील की है और आश्वासन दिया है कि गैस की पर्याप्त आपूर्ति के लिए ठोस इंतजाम किए जा रहे हैं। साथ ही, कमर्शियल गैस की सप्लाई को सुचारू बनाने के लिए होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशन के साथ चर्चा जारी है। सरकार का दावा है कि जल्द ही आपूर्ति व्यवस्था सामान्य हो जाएगी।





























