भीषण गर्मी का पूर्वानुमान
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने साल 2026 के लिए एक गंभीर चेतावनी जारी की है, जिसके अनुसार मार्च से मई के बीच देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी अधिक रहने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि फरवरी का महीना पहले ही 1901 के बाद से सबसे गर्म महीनों में दर्ज किया जा चुका है, और यदि साल के मध्य में ‘एल नीनो’ की स्थिति बनती है, तो हीट वेव (उष्णता की लहर) की तीव्रता और भी अधिक खतरनाक हो सकती है।
क्या होती है हीट वेव और इसके खतरे
हीट वेव की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब किसी क्षेत्र का तापमान लगातार कई दिनों तक सामान्य से बहुत अधिक बना रहता है। जब उच्च तापमान के साथ हवा में नमी (ह्यूमिडिटी) भी बढ़ जाती है, तो यह स्वास्थ्य के लिए और भी घातक साबित होती है। जलवायु परिवर्तन के कारण अब हीट वेव की अवधि पहले के मुकाबले लंबी और अधिक जानलेवा होती जा रही है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है।
इन लोगों को है सबसे अधिक जोखिम
गर्मी का प्रकोप सभी पर पड़ता है, लेकिन नवजात शिशु, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग इसके प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं। बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में गर्मी को सहन करने में उतना सक्षम नहीं होता, जिससे उन्हें जल्दी डिहाइड्रेशन हो सकता है। वहीं, गर्भवती महिलाओं में तेज गर्मी के कारण समय से पहले प्रसव या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होने का खतरा रहता है, इसलिए उन्हें विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
हीट वेव से बचाव के कारगर उपाय
उष्णता की लहर से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि शरीर में पानी की कमी न होने दें; इसलिए प्यास न लगने पर भी नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें। दोपहर 11 बजे से शाम 5 बजे के बीच, जब सूरज की किरणें सबसे तेज होती हैं, बाहर निकलने से बचें। यदि बाहर जाना अनिवार्य हो, तो हल्के रंग के ढीले सुती कपड़े पहनें और छाते या टोपी का इस्तेमाल करें। साथ ही, घर को ठंडा रखने के लिए खिड़कियों पर पर्दे लगाएं और रात के समय ठंडी हवा के लिए खिड़कियां खोलें।
हीट स्ट्रेस के लक्षण और आपातकालीन कदम
अत्यधिक पसीना आना, चक्कर आना, कमजोरी, सिरदर्द और मतली महसूस होना हीट स्ट्रेस के प्रमुख लक्षण हैं। यदि किसी व्यक्ति में ये लक्षण दिखें, तो उसे तुरंत ठंडी और छायादार जगह पर ले जाएं और उसके शरीर पर गीला कपड़ा रखें या उसे ओआरएस का घोल पिलाएं। यदि स्थिति गंभीर हो, जैसे कि बेहोशी या दौरे पड़ना, तो बिना देरी किए डॉक्टर या नजदीकी अस्पताल से संपर्क करना अनिवार्य है।


































