देश में बदला मौसम का मिजाज: उत्तर भारत में ओलावृष्टि और पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी का अलर्ट

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देशभर के मौसम में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है, जहां एक के बाद एक आ रहे पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से लेकर मध्य और दक्षिण भारत तक प्री-मानसून गतिविधियों ने जोर पकड़ लिया है। स्काईमेट वेदर के मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत के अनुसार, पंजाब के तरन-तारण में हाल ही में हुई ओलावृष्टि इस बदलाव की शुरुआत है। आगामी १५ और १६ मार्च को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी होने की संभावना है, जबकि निचले इलाकों में अच्छी बारिश दर्ज की जा सकती है। इस मौसमी हलचल का सीधा असर मैदानी राज्यों पर भी पड़ेगा, जिसके चलते पंजाब, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में १५ मार्च के आसपास तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बौछारें पड़ने की उम्मीद है, जिससे पिछले कुछ दिनों से बढ़ रहे तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलेगी।

मध्य भारत और राजस्थान के हिस्सों में एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र विकसित होने के कारण मौसम विभाग ने कई जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। राजस्थान के गंगानगर, बीकानेर, जयपुर और अजमेर जैसे जिलों में धूल भरी आंधी के साथ ओले गिरने की भी आशंका जताई गई है। इसी तरह, महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों सहित मध्य प्रदेश के जबलपुर, छिंदवाड़ा और सागर जैसे जिलों में १५ और १६ मार्च को सक्रिय प्री-मानसून गतिविधियों के कारण बारिश होने की संभावना है। पूर्वी भारत में बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में भी १६-१७ मार्च के दौरान टुकड़ों में बारिश हो सकती है, जबकि उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश और बिजली कड़कने की चेतावनी दी गई है।

दक्षिण भारत के राज्यों में भी इस बदलाव का असर दिखेगा, जहां तेलंगाना के हैदराबाद और आसपास के इलाकों में १६-१७ मार्च को बारिश का अनुमान है, वहीं केरल और तमिलनाडु के दक्षिणी हिस्सों में हल्की बौछारें पड़ सकती हैं। हालांकि, गुजरात में फिलहाल भीषण गर्मी का प्रकोप जारी रहेगा, जहां तापमान सामान्य से काफी ऊपर बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों ने किसानों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि इस समय होने वाली ओलावृष्टि और तेज हवाएं पकने के कगार पर खड़ी रबी फसलों को काफी नुकसान पहुंचा सकती हैं। बदलते मौसम के इस मिजाज को देखते हुए नागरिकों को अपनी योजनाएं सावधानीपूर्वक बनाने और सुरक्षित रहने का सुझाव दिया गया है

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