उत्तर प्रदेश में हाल ही में आयोजित दरोगा भर्ती परीक्षा के एक सवाल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 14 और 15 मार्च को आयोजित इस परीक्षा में एक प्रश्न ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस छेड़ दी। सवाल में एक वाक्यांश दिया गया था— “अवसर के अनुसार बदल जाने वाला” और इसके लिए सही शब्द चुनने को कहा गया था। विकल्पों में “पंडित”, “अवसरवादी”, “निष्कपट” और “सदाचारी” जैसे शब्द दिए गए थे।
यही विकल्प विवाद की वजह बन गया। कई लोगों ने आरोप लगाया कि इस प्रश्न में “पंडित” शब्द को गलत संदर्भ में दिखाया गया है, जिससे एक विशेष समुदाय की भावनाएं आहत हो सकती हैं। सोशल मीडिया पर इस सवाल की तस्वीर तेजी से वायरल हो गई और इसके बाद लोगों ने परीक्षा तैयार करने वाली एजेंसी और सरकार से जवाब मांगना शुरू कर दिया। देखते ही देखते यह मामला बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया और विपक्षी दलों के साथ-साथ कई सामाजिक संगठनों ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी।
पहली बार सामने आया मुख्यमंत्री का बयान
विवाद बढ़ने के बाद अब इस पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी भर्ती परीक्षा या सरकारी प्रक्रिया में ऐसा कोई प्रश्न नहीं होना चाहिए जिससे किसी जाति, पंथ या संप्रदाय की गरिमा को ठेस पहुंचे।
उन्होंने राज्य के सभी भर्ती बोर्डों और आयोगों के अध्यक्षों को निर्देश देते हुए कहा कि भविष्य में प्रश्नपत्र तैयार करते समय विशेष सावधानी बरती जाए। मुख्यमंत्री का कहना है कि किसी भी व्यक्ति, जाति या धार्मिक समुदाय की आस्था और सम्मान के साथ खिलवाड़ करना बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए ताकि आगे इस तरह की गलती दोबारा न हो। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि सरकार इस विवाद को गंभीरता से ले रही है और भविष्य में प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया को और अधिक सावधानी के साथ संचालित किया जाएगा।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी जताई आपत्ति
इस विवाद पर उत्तर प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री Brajesh Pathak ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि दरोगा भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में दिए गए विवादित विकल्पों पर उन्हें गंभीर आपत्ति है। उनके अनुसार यदि किसी प्रश्न के कारण किसी समाज या वर्ग की भावनाएं आहत होती हैं तो यह बिल्कुल भी उचित नहीं माना जा सकता।
ब्रजेश पाठक ने यह भी कहा कि सरकार इस मामले को हल्के में नहीं ले रही है और पूरे मामले की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब करने की बात भी कही। उनका कहना है कि सरकारी परीक्षाओं में निष्पक्षता और संवेदनशीलता दोनों जरूरी हैं। इसलिए प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि किसी शब्द या उदाहरण से किसी समुदाय की छवि पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
सोशल मीडिया पर बहस और सरकार की सख्ती
दरोगा भर्ती परीक्षा के इस सवाल को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बहस देखने को मिली। कई लोगों ने इसे परीक्षा तैयार करने वालों की बड़ी चूक बताया, जबकि कुछ लोगों का कहना था कि यह केवल एक भाषा संबंधी प्रश्न था और इसे अनावश्यक रूप से विवाद का विषय बना दिया गया। हालांकि बहस के बावजूद सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार करते समय भाषा और शब्दों का चयन बहुत सोच-समझकर किया जाना चाहिए, क्योंकि लाखों छात्र इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं और किसी भी विवाद का असर उनकी तैयारी और परीक्षा प्रक्रिया पर पड़ सकता है। सरकार की ओर से दिए गए निर्देशों के बाद उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में प्रश्नपत्र तैयार करते समय और अधिक सावधानी बरती जाएगी। इस घटना ने यह भी दिखाया है कि आज के डिजिटल दौर में कोई भी छोटी गलती तेजी से चर्चा का विषय बन सकती है और प्रशासन को तुरंत प्रतिक्रिया देनी पड़ती है।
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