गाजियाबाद के Harish Rana पिछले 13 वर्षों से गंभीर बीमारियों और पंगुता की हालत में बिस्तर पर पड़े थे। उनके जीवन की हालत इतनी गंभीर थी कि वे अपने घर पर ही पूरी तरह से निर्भर थे। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट और AIIMS की मदद से उनका जीवन समाप्त करने का निर्णय लिया गया, जिसे पैसिव यूथनेशिया के तहत अंजाम दिया गया। इस निर्णय के पीछे परिवार और चिकित्सकों की भावनात्मक और कानूनी जिम्मेदारी थी।
Harish Rana की यह यात्रा सिर्फ शारीरिक पीड़ा तक सीमित नहीं थी, बल्कि उनके और परिवार के लिए मानसिक और भावनात्मक चुनौती बन गई थी। उनकी स्थिति इतनी संवेदनशील थी कि छोटे से छोटा बदलाव भी उनके स्वास्थ्य पर भारी असर डालता। पिछले सालों में परिवार ने लगातार उन्हें स्वस्थ रखने की कोशिश की, लेकिन बीमारी की गंभीरता ने सारी उम्मीदें खत्म कर दी।
आखिरी वीडियो में हरीश का संदेश
Harish Rana की अंतिम विदाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में हरीश ने कहा, “सबसे माफी मांगते हुए जाओ…” यह शब्द उनके जीवन की अनकही पीड़ा और परिवार एवं समाज के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाते हैं। वीडियो में परिवार और डॉक्टर भावनाओं में डूबे नजर आ रहे हैं।
इस वीडियो में उनके चेहरे की हल्की मुस्कान और आंखों में नम आखें दोनों भावनाओं को जोड़ती हैं। वीडियो देख हर कोई उनकी स्थिति और जीवन के अंतिम क्षणों की गंभीरता को महसूस कर सकता है। यह केवल एक विदाई नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार और समाज के लिए चेतावनी भी है कि स्वास्थ्य और जीवन की गंभीर चुनौतियों के समय संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण कितना अहम होता है।
सुप्रीम कोर्ट और AIIMS की भूमिका
Harish Rana के अंतिम निर्णय में सुप्रीम कोर्ट और AIIMS की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथनेशिया के तहत चिकित्सकीय मार्गदर्शन और कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया। AIIMS ने चिकित्सा संबंधी सभी प्रक्रियाओं को पारदर्शी तरीके से अंजाम दिया।
A final farewell to Harish Rana, who had been in a coma in Ghaziabad for 13 years!
Harish has now arrived at AIIMS Delhi Here, his life support systems will be withdrawnand he will be granted the right to a dignified death. In this entire country, no one was able to cure Harish. pic.twitter.com/yE2jA3x9ND— Ankur Shukla (@AnkurSh50380788) March 15, 2026
AIIMS के वरिष्ठ डॉक्टरों ने कहा कि हरीश की हालत अत्यंत गंभीर थी और उन्हें किसी भी तरह का दर्द और पीड़ा कम करने का निर्णय लिया गया। डॉक्टरों ने परिवार को हर प्रक्रिया की पूरी जानकारी दी और नैतिक जिम्मेदारी निभाई। सुप्रीम कोर्ट के मार्गदर्शन में यह सुनिश्चित किया गया कि कोई भी निर्णय जल्दबाजी या गलतफहमी पर आधारित न हो।
परिवार की भावनात्मक स्थिति और समाज की प्रतिक्रिया
Harish Rana के परिवार ने कहा कि वे इस निर्णय के पीछे मजबूर थे और उन्होंने हर विकल्प पर विचार किया। परिवार के सदस्यों ने कहा कि हरीश की बीमारी और लंबी पीड़ा ने उन्हें इस कठिन कदम के लिए तैयार किया। परिवार ने यह भी कहा कि समाज और मीडिया से अपील है कि इस दर्दनाक स्थिति में संवेदनशीलता बरतें और अफवाहों से बचें।
समाज और सोशल मीडिया पर लोग हरीश की पीड़ा और अंतिम विदाई पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे जीवन और मौत की गंभीर वास्तविकता के रूप में देखा। सोशल मीडिया पर यह संदेश फैल रहा है कि स्वास्थ्य संबंधी गंभीर मामलों में मानवीय दृष्टिकोण, कानूनी मार्गदर्शन और परिवार की जिम्मेदारी बहुत अहम होती है।
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