संसद के गेट पर चाय-पकौड़े खाते दिखे राहुल गांधी, अमित शाह ने जमकर सुनाई खरी-खरी

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देश की राजनीति में एक बार फिर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस बार मामला संसद परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान चाय-नाश्ता करने से जुड़ा है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने असम के Guwahati में आयोजित एक जनसभा में कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि संसद देश के लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण संस्था है और वहां इस तरह का व्यवहार उसकी गरिमा के अनुरूप नहीं है। गृह मंत्री ने कहा कि विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन विरोध का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। शाह के बयान के बाद यह मुद्दा तेजी से राजनीतिक बहस का विषय बन गया है और सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इसकी चर्चा हो रही है।

अमित शाह ने सभा में उठाया सवाल – “क्या यही विरोध का तरीका है?”

रविवार को गुवाहाटी में आयोजित जनसभा में बोलते हुए अमित शाह ने राहुल गांधी के हालिया विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि कभी-कभी राहुल गांधी संसद के दरवाजे पर बैठकर चाय-पकौड़े खाते नजर आते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उन्हें यह समझ नहीं है कि नाश्ता करने की जगह और समय भी मायने रखता है। शाह ने कहा कि संसद सिर्फ एक इमारत नहीं बल्कि भारत के लोकतंत्र का प्रतीक है और वहां का हर व्यवहार दुनिया भर में भारत की छवि को प्रभावित करता है। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन ऐसा विरोध जो संस्थाओं की गरिमा को प्रभावित करे, वह लोकतांत्रिक परंपरा के अनुकूल नहीं माना जा सकता। शाह के इस बयान के बाद सभा में मौजूद लोगों ने जोरदार प्रतिक्रिया दी और यह बयान तुरंत मीडिया की सुर्खियों में आ गया।

12 मार्च का विरोध प्रदर्शन और वायरल तस्वीरें

दरअसल यह पूरा विवाद 12 मार्च को हुए उस विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है, जब राहुल गांधी संसद परिसर के **मकर द्वार** के पास चल रहे विरोध में शामिल हुए थे। उस दौरान एलपीजी गैस की कथित कमी और उससे जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्ष के कई नेता सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान कुछ तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिनमें राहुल गांधी अपने सहयोगियों के साथ बैठकर चाय और नाश्ता करते नजर आए। ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं और देखते ही देखते राजनीतिक विवाद का कारण बन गईं। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि यह एक सामान्य और सहज क्षण था, जबकि भाजपा नेताओं ने इसे संसद की गरिमा से जोड़ते हुए आलोचना शुरू कर दी।

संसद की गरिमा पर बहस और लोकसभा अध्यक्ष तक पहुंचा मामला

इस पूरे मामले को लेकर भाजपा सांसद Nishikant Dubey ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को एक नोटिस सौंपते हुए इस घटना पर आपत्ति जताई और कहा कि संसद परिसर में इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है। जानकारी के अनुसार, उन्होंने इस घटना से जुड़ा एक पेन ड्राइव भी अध्यक्ष को दिया है, जिसमें कथित तौर पर विरोध प्रदर्शन और चाय-नाश्ते से जुड़ी वीडियो क्लिप शामिल है। भाजपा का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां संसद की गरिमा को प्रभावित करती हैं, जबकि कांग्रेस का तर्क है कि विपक्ष का शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है और इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना गलत है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर किस तरह की राजनीतिक बहस देखने को मिलती है।

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