उत्तर भारत में बदला मौसम का मिजाज देश की राजधानी दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में मौसम ने अचानक करवट ली है। रविवार सुबह दिल्ली-एनसीआर में हुई हल्की बारिश और ३० से ४० किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज हवाओं ने तापमान में गिरावट दर्ज की है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल की पहली प्री-मानसून बारिश अपने सामान्य समय से करीब १० दिन पहले ही आ गई है। इस बदलाव का मुख्य कारण सक्रिय ‘पश्चिमी विक्षोभ’ (Western Disturbance) और मध्य पाकिस्तान के ऊपर बना चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र है।
१८ से २० मार्च के बीच फिर होगी बारिश मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि मौसम में यह उतार-चढ़ाव अभी जारी रहेगा। अनुमान है कि १८ से २० मार्च के बीच दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तरी राजस्थान में फिर से तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। इस दौरान बादलों की आवाजाही बनी रहेगी, जिससे इस सप्ताह गर्मी बढ़ने की रफ्तार पर कुछ समय के लिए ब्रेक लग सकता है। सोमवार को भी दिल्ली में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है।
उत्तर प्रदेश में ओलावृष्टि की चेतावनी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भी पिछले दो दिनों से मौसम का मिजाज बदला हुआ है। रविवार को लखनऊ का अधिकतम तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में आंधी, बिजली गिरने और ओलावृष्टि (ओले गिरने) की चेतावनी जारी की है। आगामी दिनों में उत्तर प्रदेश के आसमान में हल्के बादल छाए रहेंगे और न्यूनतम तापमान १७ डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है।
पहाड़ों पर बर्फबारी और अन्य राज्यों का हाल
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पहाड़ी राज्य: उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है, जबकि निचले इलाकों में बारिश हो सकती है।
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झारखंड: बंगाल की खाड़ी के आसपास बादलों के बनने के कारण झारखंड के कई इलाकों में तेज हवा, गरज-चमक और हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है।
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मुंबई और दक्षिण भारत: मुंबई में मौसम सामान्य रहेगा और तापमान ३० से ३२ डिग्री के आसपास रहेगा। वहीं, दक्षिण भारत के राज्यों जैसे तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना में मौसम शुष्क और गर्म रहने की उम्मीद है, जहां पारा ३५ डिग्री तक पहुंच सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हरियाली की कमी, बढ़ता प्रदूषण और समुद्री गतिविधियों के कारण मौसम के चक्र में ऐसे बदलाव देखने को मिल रहे हैं। आने वाले १५ से २० दिनों तक वातावरण में नमी और बादलों का असर बना रह सकता है।


























