मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों पर बाधाओं के कारण एलपीजी सप्लाई को लेकर पिछले कुछ दिनों से चिंता बनी हुई थी। लेकिन अब भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। फारस की खाड़ी से दो भारतीय जहाज—Shivalik LPG tanker और Nanda Devi LPG tanker—एलपीजी गैस लेकर भारत की ओर रवाना हो चुके हैं। जानकारी के मुताबिक इन दोनों जहाजों को हाल ही में Strait of Hormuz से बाहर निकलने की अनुमति मिली थी। यह वही समुद्री मार्ग है जो इन दिनों क्षेत्रीय तनाव के कारण कई जहाजों के लिए बंद जैसा हो गया था। जहाजों के भारत पहुंचने से कुछ समय के लिए गैस सप्लाई में राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
दोनों जहाजों में कुल 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी
सरकारी अधिकारियों के अनुसार इन दोनों जहाजों पर कुल मिलाकर लगभग 92,700 मीट्रिक टन LPG लदी हुई है। इसमें से शिवालिक जहाज पर करीब 45,000 मीट्रिक टन और नंदादेवी जहाज पर लगभग 47,700 मीट्रिक टन LPG गैस मौजूद है। बताया जा रहा है कि एक जहाज Mundra Port पर पहुंच रहा है, जबकि दूसरा Kandla Port पर डॉक करेगा। भारत में रोजाना एलपीजी की खपत लगभग 8,000 मीट्रिक टन के आसपास है। इस हिसाब से देखें तो इन दोनों जहाजों पर लदी गैस करीब 13 दिनों तक देश की जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकती है। हालांकि इसे स्थायी समाधान नहीं माना जा रहा, लेकिन फिलहाल इसे राहत की बड़ी खबर के रूप में देखा जा रहा है।
अब भी फारस की खाड़ी में फंसे हैं कई भारतीय जहाज
जहाजों के भारत पहुंचने की खबर राहत जरूर दे रही है, लेकिन पूरी स्थिति अभी भी सामान्य नहीं हुई है। अधिकारियों के अनुसार फारस की खाड़ी में अभी भी भारत के झंडे वाले करीब 22 जहाज फंसे हुए हैं, जो अब तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर नहीं निकल पाए हैं। इन दो जहाजों से मिलने वाली LPG गैस से सीमित समय के लिए ही राहत मिलेगी। अगर आने वाले दिनों में बाकी जहाजों को भी रास्ता मिल जाता है, तो देश में गैस सप्लाई धीरे-धीरे सामान्य हो सकती है। इसके अलावा सरकार लगातार अंतरराष्ट्रीय हालात पर नजर बनाए हुए है ताकि ऊर्जा आपूर्ति पर ज्यादा असर न पड़े।
देश में गैस खपत तेजी से बढ़ी, उत्पादन भी बढ़ाया गया
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन दशकों में भारत में LPG की खपत में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 1998–99 में जहां देश में एलपीजी की वार्षिक खपत लगभग 4.46 लाख मीट्रिक टन थी, वहीं अब यह बढ़कर 2025–26 में करीब 27.54 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। यानी घरेलू रसोई गैस का इस्तेमाल कई गुना बढ़ चुका है। वर्तमान में भारत में रोजाना करीब 7,500 से 8,000 मीट्रिक टन एलपीजी की खपत होती है। हालांकि हाल के संकट को देखते हुए देश में एलपीजी उत्पादन भी बढ़ाया गया है। पहले जहां उत्पादन करीब 1.158 मिलियन टन प्रति माह था, वहीं अब इसे बढ़ाकर लगभग 1.5 मिलियन टन प्रति माह कर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात में सुधार होता है और हॉर्मुज मार्ग से जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो जाती है, तो भारत में एलपीजी सप्लाई भी जल्द पहले की तरह स्थिर हो सकती है।
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