चैत्र अमावस्या की तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को चैत्र अमावस्या कहा जाता है। वर्ष 2026 में अमावस्या तिथि का प्रारंभ 18 मार्च को सुबह 08:28 बजे होगा और इसका समापन 19 मार्च को सुबह 06:55 बजे होगा। धार्मिक दृष्टिकोण से इस तिथि का विशेष महत्व है, क्योंकि इस दिन किए गए स्नान और दान का फल अक्षय होता है।
पितृ तर्पण और धार्मिक अनुष्ठान
चैत्र अमावस्या मुख्य रूप से पितरों को समर्पित मानी जाती है। ऐसी मान्यता है कि पितरों की आत्मा की शांति और उन्हें मोक्ष दिलाने के लिए इस दिन व्रत रखना और पिंडदान करना अत्यंत आवश्यक है। इस दिन किसी पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए और अपने पूर्वजों के नाम से तर्पण करना चाहिए।
दान-पुण्य और शनि देव की पूजा
इस दिन यथाशक्ति अन्न, वस्त्र, स्वर्ण और गौ दान करने का विधान है। पितरों के श्राद्ध के पश्चात गरीब या ब्राह्मण को भोजन कराना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है। साथ ही, अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना और शनि देव को नीले फूल, काले तिल और सरसों का तेल अर्पित करने से शनि दोषों से मुक्ति मिलती है।
व्रत का महत्व और फल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति चैत्र अमावस्या पर श्रद्धापूर्वक व्रत और दान-पुण्य करता है, उसे न केवल पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, बल्कि उसे अमोघ फल की भी प्राप्ति होती है। यह अमावस्या इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके अगले ही दिन से चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो जाता है।































