No Road-No Toll प्रदर्शन में भड़का गुस्सा! संतों के बीच धरना और टोल प्लाजा में तोड़फोड़ का सनसनीखेज मामला

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ग्वालियर-भिंड-इटावा नेशनल हाईवे-719 पर हाल ही में हुए ‘No Road-No Toll’ आंदोलन ने स्थानीय लोगों और प्रशासन दोनों को चौंका दिया। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से सड़क की खराब स्थिति और टोल वसूली के विरोध में शुरू किया गया। स्थानीय नागरिकों और संत समाज का आरोप है कि सड़क की हालत इतनी खराब है कि टोल वसूलना अनुचित है। इस मुद्दे पर कई महीनों से प्रशासन को चेतावनी दी जा रही थी, लेकिन कार्यवाही में देरी के कारण विरोध तेजी से बढ़ गया। विरोध के दौरान संतों ने सड़क पर धूनी जमाकर धरना दिया, जिससे हाईवे पर यातायात प्रभावित हुआ और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

स्थानीय मीडिया के अनुसार, संतों ने जोर देकर कहा कि टोल वसूली और खराब सड़क की समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रशासन से सड़क चौड़ीकरण और सुरक्षित सड़क निर्माण की मांग दोहराई। इस आंदोलन का नेतृत्व कैलिदास महाराज और अन्य साधु-संतों ने किया, जिन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल सड़क की नहीं बल्कि सुरक्षित यात्रा और जनहित की है।

टोल प्लाजा में तोड़फोड़ और आरोपी युवक

धरने के दौरान एक युवक ने कथित तौर पर टोल प्लाजा केबिन और वहां लगे सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए, जिससे घटनास्थल पर भगदड़ और तनाव फैल गया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी युवक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया। अधिकारियों ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज की जांच जारी है और आगे की जांच में यह पता लगाया जाएगा कि प्रदर्शन में कौन-कौन शामिल थे और किसने क्या कार्य किया।

इस घटना के बाद स्थानीय नागरिक और यात्री भी हतप्रभ रह गए। कई लोगों की गाड़ियां हाईवे पर फंस गईं और उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा। पुलिस और प्रशासन ने कहा कि भविष्य में ऐसे प्रदर्शनों की निगरानी और सुरक्षा के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि हिंसा और तोड़फोड़ की किसी भी घटना को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

संतों और स्थानीय लोगों की पुरानी मांगें

No Road-No Toll आंदोलन की जड़ें पुरानी हैं। हाईवे-719, जो एटावा से भिंड और ग्वालियर तक जाता है, को चौड़ा करने और सुरक्षित लेन विकसित करने की मांग लंबे समय से उठ रही है। संत समाज का कहना है कि सड़क की वर्तमान स्थिति में दुर्घटनाओं की संभावना अधिक है। कई यात्रियों की मौतें और दुर्घटनाएं इस बात का सबूत हैं कि सड़क को अपग्रेड करना जरूरी है।

स्थानीय लोगों और संतों का यह भी कहना है कि प्रशासन ने कई बार आश्वासन दिया, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके चलते उनका आक्रोश प्रदर्शन में बदल गया। विरोध प्रदर्शन केवल टोल वसूली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सड़क निर्माण और जनहित की मांगों का प्रतीक बन गया।

सरकारी प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई

प्रदर्शन और हिंसक घटनाओं के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है। पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि टोल वसूली और हाईवे की स्थिति पर विशेष समीक्षा बैठक की जाएगी।

स्थानीय नेताओं और अधिकारियों का कहना है कि जनता की मांगों को गंभीरता से लिया जाएगा। भविष्य में टोल वसूली, सड़क निर्माण और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन ने यह भी बताया कि ऐसे प्रदर्शनों और हिंसक घटनाओं से निपटने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी की जाएगी।

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