170 दिन की जेल के बाद सोनम वांगचुक का ऐलान: ‘मेरी रिहाई मायने नहीं रखती, लद्दाख की लड़ाई अभी…’

0
6

लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक 170 दिन की जेल की सजा काटने के बाद आज सुबह जोधपुर से रिहा हुए। रिहाई के तुरंत बाद दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए उन्होंने साफ किया कि उनकी व्यक्तिगत रिहाई कोई बड़ी जीत नहीं है। सोनम ने कहा कि उनका असली मकसद लद्दाख के लोगों के हितों की लड़ाई को पूरी तरह जीतना है। उन्होंने कहा,
“मेरी रिहाई कोई मायने नहीं रखती। यह लड़ाई सिर्फ मेरी नहीं है, यह पूरे लद्दाख के लोगों की है। जब तक वहां के लोग सुरक्षित और खुशहाल नहीं होंगे, हम इसे जीत नहीं कह सकते।”

सोनम का यह बयान उनके समर्थकों और लद्दाखवासियों के लिए एक बड़ी उम्मीद की किरण बन गया है। उनके समर्थक सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर उनका स्वागत कर रहे हैं, जबकि कई राजनीतिक दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनके साहस की तारीफ की है।

लद्दाख के हितों की प्राथमिकताएँ

सोनम वांगचुक ने अपने संबोधन में केंद्र की सरकार को दो टूक चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोगों की भावनाओं और उनके क्षेत्र के विकास की अनदेखी नहीं की जा सकती। सोनम ने विशेष रूप से यह ज़ोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और स्थानीय शिक्षा को प्राथमिकता दी जाए।

उन्होंने कहा, “हमारी लड़ाई सिर्फ राजनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं है। यह हमारे लोगों की संस्कृति, उनके अधिकार और भविष्य की सुरक्षा के लिए है। हम तब तक शांत नहीं बैठेंगे जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होतीं।”

सोनम ने जेल में रहते हुए भी अपनी टीम और स्थानीय प्रतिनिधियों से संपर्क बनाए रखा। उन्होंने बताया कि जेल में रहते हुए उन्हें भरोसा था कि न्याय मिलेगा और उनकी लड़ाई कमजोर नहीं पड़ेगी।

जेल में बिताए गए 170 दिन और उनका असर

170 दिन की जेल में बिताए गए समय ने सोनम वांगचुक को और मजबूत किया। उन्होंने जेल में अपने अनुभवों का ज़िक्र करते हुए कहा कि यह समय उनके विचारों और लद्दाखवासियों के हितों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को और भी बढ़ा गया।

सोनम ने कहा, “जेल का अनुभव मेरे लिए व्यक्तिगत तौर पर चुनौतीपूर्ण था, लेकिन यह मुझे और दृढ़ बना गया। मैंने महसूस किया कि असली बदलाव तब ही संभव है जब हम अपने लोगों के अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाएं।”

इस दौरान सोनम ने अपने सहयोगियों और समर्थकों से कहा कि वे संयम बनाए रखें और कानूनी रास्ते का पालन करें। उन्होंने साफ किया कि उनकी लड़ाई में हिंसा की कोई जगह नहीं है।

आगे की रणनीति और सरकार को संदेश

रिहाई के बाद सोनम वांगचुक ने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया कि वे लद्दाख के मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन से अपील की कि वे लद्दाखवासियों की आवाज़ को सुने और उनके हितों का सम्मान करें।

सोनम ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में वे स्थानीय प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं के साथ मिलकर कई अभियान चलाएंगे। उनका उद्देश्य लद्दाख के लोगों को सशक्त बनाना और उनके अधिकारों की रक्षा करना है।

“मेरी रिहाई मेरी लड़ाई की समाप्ति नहीं है। यह सिर्फ एक नई शुरुआत है। लद्दाखवासियों का भविष्य सुरक्षित करना और उनकी आवाज़ को मजबूत बनाना ही मेरी प्राथमिकता है,” उन्होंने अपने संबोधन में कहा।

सोनम वांगचुक के इस ऐलान के बाद लद्दाख और देश भर में उनके समर्थकों में उत्साह और उम्मीद की लहर दौड़ गई है। यह स्पष्ट हो गया है कि सोनम की लड़ाई अब भी जारी है और उनके अगले कदम देश की राजनीति और सामाजिक सुधारों पर गहरा असर डाल सकते हैं।

 

The post 170 दिन की जेल के बाद सोनम वांगचुक का ऐलान: ‘मेरी रिहाई मायने नहीं रखती, लद्दाख की लड़ाई अभी…’ appeared first on UP Varta News.

विज्ञापन 2