चांदी के आयात नियमों में बड़ा बदलाव
भारत सरकार ने जेम्स और ज्वेलरी सेक्टर को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने एक अधिसूचना जारी करते हुए सस्ते हीरों से जड़ी चांदी की ज्वेलरी के आयात पर तत्काल प्रभाव से पाबंदी लगा दी है। अब तक इन आभूषणों का आयात ‘फ्री’ श्रेणी में था, लेकिन अब इन्हें ‘प्रतिबंधित’ (Restricted) श्रेणी में डाल दिया गया है।
3 जून 2026 तक लागू रहेगी नई व्यवस्था
सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह नई व्यवस्था 3 जून 2026 तक प्रभावी रहेगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब विदेशी चांदी के गहने मंगवाने के लिए आयातकों को सरकार से अनिवार्य रूप से लाइसेंस लेना होगा। पिछले कुछ समय से चांदी की कीमतों में हो रहे उतार-चढ़ाव और वैश्विक तनाव के बीच सरकार का यह कदम कमोडिटी मार्केट में बड़ी हलचल पैदा कर सकता है।
स्थानीय निर्माताओं को मिलेगा बढ़ावा
इस फैसले का मुख्य उद्देश्य घरेलू ज्वेलरी उद्योग को संरक्षण देना है। थाईलैंड, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे आसियान देशों से सस्ते हीरों जड़े चांदी के गहनों की भारी आवक हो रही थी, जिससे सूरत और मुंबई जैसे भारतीय ज्वेलरी केंद्रों के स्थानीय निर्माताओं को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा था। आयात पर इस नियंत्रण से अब घरेलू उत्पादन (Domestic Production) को गति मिलने की उम्मीद है।
लाखों कारीगरों और रोजगार पर असर
जेम्स और ज्वेलरी सेक्टर एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस निर्णय से देश के लाखों कारीगरों को मजबूती मिलेगी। हालांकि, उपभोक्ताओं के लिए सस्ते विदेशी विकल्प अब कम हो सकते हैं, जिससे कीमतों में थोड़ा प्रभाव पड़ सकता है। लेकिन इसके बदले भारतीय बाजार में शुद्ध और उच्च गुणवत्ता वाले ‘मेड इन इंडिया’ गहनों के अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे, जो देश की अर्थव्यवस्था को और सुदृढ़ करेंगे।























