उत्तर भारत में फिर सक्रिय होगा पश्चिमी विक्षोभ स्काईमेट वेदर के ताजा अनुमान के अनुसार, देश में एक के बाद एक पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) दस्तक दे रहे हैं। १७ मार्च से पहाड़ों पर हल्की बारिश शुरू हो गई है, लेकिन असली बदलाव १८ मार्च से देखने को मिलेगा। उत्तर भारत में पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक मौसम तेजी से बदलने वाला है। १८ मार्च को पहाड़ों पर बारिश की तीव्रता बढ़ेगी, जबकि राजस्थान में धूल भरी आंधी चलने की संभावना है। १९ और २० मार्च को यह सिस्टम और भी सक्रिय हो जाएगा, जिससे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश होगी।
महाराष्ट्र और मध्य भारत में बारिश का असर महाराष्ट्र के लिए भी आने वाले दिन महत्वपूर्ण हैं। १८ मार्च को विदर्भ और मराठवाड़ा के दक्षिणी इलाकों में बारिश की संभावना बन रही है। इसके बाद १९ मार्च को नासिक, जलगांव, संभाजीनगर, अहिल्याबाई नगर और पुणे सहित मध्य महाराष्ट्र के कई जिलों में मौसम खराब रह सकता है। २० मार्च को यह बारिश विदर्भ की ओर खिसक जाएगी। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी १८ से २० मार्च के दौरान कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाएं चलने का अनुमान है, जिससे तापमान में गिरावट आएगी।
दक्षिण और पूर्वी भारत में भी हलचल दक्षिण भारत में तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कई हिस्सों में १९ और २० मार्च को बारिश होने की उम्मीद है। केरल और तमिलनाडु में भी २० मार्च के आसपास छिटपुट बौछारें पड़ सकती हैं। पूर्वी भारत की बात करें तो झारखंड और बिहार के कुछ जिलों में २० मार्च को बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी। हालांकि, २१ मार्च से पश्चिमी राज्यों से मौसम साफ होना शुरू हो जाएगा और बारिश का केंद्र पूर्वी भारत और दक्षिण भारत की ओर शिफ्ट हो जाएगा।
किसानों के लिए विशेष सावधानी की सलाह मौसम वैज्ञानिकों ने किसानों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी है। १९ और २० मार्च को होने वाली बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं, जिससे तैयार फसलों को नुकसान होने की आशंका है। जिन किसानों की फसल कटाई के लिए तैयार है, उन्हें सलाह दी गई है कि वे २० तारीख से पहले अपनी फसल काट कर सुरक्षित स्थान पर रख लें। तेज हवाओं और छिटपुट ओलावृष्टि के कारण रबी फसलों पर बुरा असर पड़ सकता है, इसलिए मौसम की पल-पल की जानकारी रखना आवश्यक है।
























