वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट में घोषित नए नियम होंगे लागू; शेयर बाजार, बायबैक और इनकम टैक्स में बड़े बदलाव।
इनकम टैक्स और आईटीआर नियमों में बदलाव
1 अप्रैल 2026 से देश भर में टैक्स से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। बजट में किए गए ऐलानों के लागू होने के साथ ही नौकरीपेशा, बिजनेसमैन और निवेशकों के लिए टैक्स भरने का तरीका बदल जाएगा। कुछ खास श्रेणी के लोगों के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख भी आगे बढ़ाई गई है, जिससे उन्हें कागजी कार्रवाई पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा। साथ ही, नए टैक्स स्लैब के तहत कुछ छूट भी दी गई हैं।
शेयर बायबैक और कैपिटल गेन टैक्स
शेयर बाजार के निवेशकों के लिए ‘बायबैक’ के नियमों में राहत दी गई है। अब बायबैक से मिलने वाली पूरी रकम को डिविडेंड नहीं माना जाएगा, बल्कि इसे ‘कैपिटल गेन’ के रूप में देखा जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि निवेशकों को पूरी रकम पर टैक्स नहीं देना होगा, बल्कि केवल उस मुनाफे पर टैक्स लगेगा जो उन्होंने शेयर बेचकर कमाया है। उदाहरण के तौर पर, यदि 100 रुपये का शेयर 150 रुपये में बायबैक होता है, तो टैक्स केवल 50 रुपये के मुनाफे पर देना होगा।
फ्यूचर एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग हुई महंगी
शेयर बाजार में फ्यूचर और ऑप्शंस में ट्रेड करने वालों के लिए बुरी खबर है। सरकार ने ट्रेडिंग में बढ़ते जोखिम को देखते हुए टैक्स की दरों में बढ़ोतरी कर दी है। फ्यूचर्स पर टैक्स 0.2% से बढ़ाकर 0.5% कर दिया गया है, वहीं ऑप्शंस पर टैक्स 0.1% से बढ़कर 0.15% हो गया है। इस बदलाव के कारण हर ट्रेड पर निवेशकों की जेब से ज्यादा पैसा कटेगा, जिससे उनके मुनाफे में कमी आ सकती है।
गोल्ड बॉन्ड और अन्य महत्वपूर्ण नियम
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) के नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब टैक्स छूट का लाभ केवल उन्हीं को मिलेगा जिन्होंने बॉन्ड सीधे सरकार से खरीदे हैं और मैच्योरिटी तक अपने पास रखे हैं। यदि कोई व्यक्ति शेयर बाजार से ‘सेकंड हैंड’ बॉन्ड खरीदता है, तो उसे मुनाफे पर टैक्स देना होगा। इसके अलावा, 1 अप्रैल से पैन कार्ड, आधार कार्ड और एलपीजी की कीमतों से जुड़े नए दिशा-निर्देश भी प्रभावी होंगे, जो करोड़ों लोगों के वित्तीय प्रबंधन को प्रभावित करेंगे।


























