EPFO पेंशन पर बड़ी खबर: न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की संसदीय समिति ने की सिफारिश

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न्यूनतम पेंशन की समीक्षा की मांग

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के पेंशनभोगियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। संसद की एक स्थायी समिति ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा ₹1000 प्रति माह की न्यूनतम पेंशन आज की महंगाई के दौर में पूरी तरह अपर्याप्त है। समिति ने कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) के तहत मिलने वाली इस राशि की तुरंत और व्यापक समीक्षा करने की जोरदार सिफारिश की है।

महंगाई और बुनियादी जरूरतों का हवाला

श्रम और कौशल विकास से जुड़ी संसदीय समिति ने अपनी 15वीं रिपोर्ट में कहा है कि देश भर के बुजुर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर पेंशनभोगियों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ₹1000 की राशि में इलाज का खर्च और रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी मुमकिन नहीं है। पेंशनभोगी लंबे समय से इस राशि को बढ़ाकर ₹7500 प्रति माह करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

बजटीय सहायता बढ़ाने का सुझाव

समिति ने श्रम और रोजगार मंत्रालय को सुझाव दिया है कि सरकार को इस योजना के लिए बजटीय समर्थन बढ़ाने के विकल्पों पर विचार करना चाहिए। वर्तमान में सरकार इस योजना में 1.16% का योगदान देती है, लेकिन समिति का मानना है कि सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए इसे और बेहतर बनाने की आवश्यकता है ताकि पेंशन की राशि को समय के अनुसार सम्मानजनक स्तर तक लाया जा सके।

कॉन्ट्रैक्ट वर्कर और मुआवजे का मुद्दा

रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण विषय उठाया गया है, जो ‘ठेका श्रमिकों’ (Contract Workers) से जुड़ा है। समिति ने पाया कि कई कॉन्ट्रैक्ट वर्कर नियमित कर्मचारियों की तरह ही कठिन कार्य करते हैं, लेकिन दुर्घटना की स्थिति में उन्हें मुआवजा और राहत मिलने में काफी देरी होती है। समिति ने सरकार से इस दिशा में भी ठोस कदम उठाने की अपील की है ताकि इन श्रमिकों को बेहतर सुरक्षा मिल सके।

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