उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ का असर
देश के मौसम में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में पहुंच चुका है, जबकि दूसरा विक्षोभ 20 मार्च के आसपास दस्तक देगा। इसके प्रभाव से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ों पर मूसलाधार बारिश और भारी बर्फबारी की संभावना है। श्रीनगर, गुलमर्ग और सोनमर्ग जैसे इलाकों में बर्फबारी का दौर 20 मार्च तक जारी रह सकता है।
मैदानी राज्यों में प्री-मानसून गतिविधियों की शुरुआत
राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में प्री-मानसून गतिविधियां शुरू हो गई हैं। राजस्थान के जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर और बाड़मेर जैसे जिलों में धूल भरी आंधी और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने के आसार हैं। पंजाब और हरियाणा में 20 मार्च को सबसे तीव्र मौसम रहने की उम्मीद है, जहां तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। उत्तर प्रदेश और बिहार में भी 20 से 21 मार्च के दौरान लगभग सभी जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
मध्य और दक्षिण भारत का मौसम अपडेट
मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में भी बादलों की आवाजाही और बारिश की संभावना बनी हुई है। महाराष्ट्र के विदर्भ, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र में गरज के साथ छींटे पड़ सकते हैं। वहीं, दक्षिण भारत के केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ आंतरिक हिस्सों में अगले दो-तीन दिनों तक बारिश जारी रहने का अनुमान है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा में भी 20-21 मार्च को बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
किसानों के लिए चिंता की बात
मौसम विभाग ने किसानों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। इस समय फसलें पकने की कगार पर हैं, ऐसे में तेज हवाओं, आंधी और ओलावृष्टि (Hailstorm) से फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है। विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। सौराष्ट्र और कच्छ को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में अगले कुछ दिन मौसम चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं।




















