UP News: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में ईद-उल-फितर के त्योहार से ठीक पहले प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर अब तक का सबसे सख्त रुख अपना लिया है। पुलिस प्रशासन ने साफ और कड़े शब्दों में चेतावनी जारी की है कि इस बार नमाज के नाम पर सड़कों को घेरने या सार्वजनिक रास्तों पर जमावड़ा लगाने की इजाजत बिल्कुल नहीं दी जाएगी। यह आदेश केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक ऐसा ‘सस्पेंस’ छिपा है जिसने नियम तोड़ने वालों की नींद उड़ा दी है। पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी ने सड़क पर नमाज अदा की, तो उस पर न केवल मुकदमा दर्ज होगा, बल्कि उसकी रिपोर्ट सीधे पासपोर्ट कार्यालय भेजी जाएगी। इसका मतलब है कि एक गलती और आपका पासपोर्ट हमेशा के लिए रद या ब्लॉक हो सकता है, जिससे विदेश जाने का सपना अधूरा रह जाएगा।
नमाज के लिए नई व्यवस्था: कैमरों की नजर में होगा हर कोना
मेरठ पुलिस और जिला प्रशासन की उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि ईद की नमाज केवल निर्धारित ईदगाहों और मस्जिदों के परिसर के भीतर ही अदा की जानी चाहिए। सालों से चली आ रही सड़कों पर चटाई बिछाकर नमाज पढ़ने की प्रथा पर इस बार पूर्ण विराम लगा दिया गया है। पुलिस अधिकारियों ने जानकारी दी है कि संवेदनशील इलाकों और प्रमुख चौराहों पर ड्रोन कैमरों के जरिए निगरानी रखी जाएगी। इसके अलावा, पुलिस की विशेष टीमें हर गतिविधि की वीडियोग्राफी करेंगी। यदि कोई व्यक्ति या समूह जबरन सड़क पर नमाज पढ़ते हुए पाया जाता है, तो साक्ष्यों के आधार पर तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि सड़कों पर भीड़ जमा होने से एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और आम राहगीरों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
पासपोर्ट और करियर पर गिरेगी गाज: पुलिस की सीधी चेतावनी
इस बार के फरमान में सबसे ज्यादा चर्चा ‘पासपोर्ट एक्शन’ की हो रही है। मेरठ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से स्पष्ट किया है कि कानून का उल्लंघन करने वालों का नाम ‘दागी’ सूची में डाल दिया जाएगा। पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification) की प्रक्रिया के दौरान ऐसे व्यक्तियों की रिपोर्ट में उनके द्वारा किए गए अपराध और कानून के उल्लंघन का विशेष रूप से उल्लेख किया जाएगा। इसका सीधा असर उनके पासपोर्ट रिन्यूअल या नए आवेदन पर पड़ेगा। इतना ही नहीं, जो युवा सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए भी यह मुकदमा गले की फांस बन सकता है। प्रशासन का यह कदम शहर में अनुशासन बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए एक ‘प्रिवेंटिव स्ट्राइक’ के तौर पर देखा जा रहा है।
धर्मगुरुओं का सहयोग और शांति की अपील
नियमों की सख्ती के बीच प्रशासन ने आपसी संवाद का रास्ता भी खुला रखा है। पुलिस ने शहर के तमाम बड़े उलेमाओं, मौलवियों और शांति समिति के सदस्यों के साथ बैठकें की हैं। प्रशासन ने सुझाव दिया है कि यदि मस्जिदों या ईदगाहों में जगह कम पड़ती है, तो नमाज के समय को दो हिस्सों (शिफ्ट) में बांटा जा सकता है। इससे नमाजियों को भी सुविधा होगी और सड़क पर आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। शहर के कई धर्मगुरुओं ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए अपील की है कि इबादत ऐसे की जानी चाहिए जिससे दूसरों को तकलीफ न हो। पुलिस ने स्थानीय लोगों से सोशल मीडिया पर फैलने वाली किसी भी तरह की अफवाह से बचने और शांतिपूर्ण तरीके से भाईचारे के साथ त्योहार मनाने का आग्रह किया है।
चप्पे-चप्पे पर पहरा: सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम
ईद के दिन किसी भी प्रकार की अराजकता को रोकने के लिए मेरठ को कई जोन और सेक्टरों में विभाजित किया गया है। स्थानीय पुलिस के साथ-साथ पीएसी (PAC) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की कंपनियों को तैनात किया गया है। पुलिस की साइबर सेल 24 घंटे सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर नजर रख रही है ताकि कोई भी भड़काऊ पोस्ट साझा न कर सके। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि कानून सबके लिए बराबर है और शहर की शांति भंग करने की कोशिश करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन की इस सख्ती का उद्देश्य नमाजियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और शहर के ट्रैफिक को सुचारू रखना है, ताकि ईद की खुशियों में कोई खलल न पड़े।
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