विधानसभा से राज्यसभा तक नीतीश का सफर, चारों सदनों में पहुंचने वाले बनेंगे बिहार के पांचवें नेता

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की घोषणा के साथ ही एक नया राजनीतिक रिकॉर्ड बनने जा रहा है। राज्यसभा सदस्य बनने के बाद वे बिहार के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो जाएंगे जिन्होंने चारों सदनों की सदस्यता हासिल की है। इन चारों सदनों में लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद शामिल हैं।

राजनीतिक रूप से यह उपलब्धि बेहद खास मानी जाती है। नीतीश कुमार इससे पहले लोकसभा, विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं। राज्यसभा पहुंचने के बाद उनका नाम इस खास सूची में जुड़ जाएगा।

बिहार के पांचवें नेता बनेंगे नीतीश
राज्यसभा सदस्य बनने के बाद नीतीश कुमार बिहार के पांचवें ऐसे नेता होंगे जो चारों सदनों में रह चुके हैं। इससे पहले यह उपलब्धि कुछ ही नेताओं को मिली है।

इन नेताओं में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद का नाम प्रमुख है। इसके अलावा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी इस सूची में शामिल हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि भी चारों सदनों के सदस्य रह चुके हैं। वहीं पूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत सुशील कुमार मोदी को भी यह गौरव प्राप्त था।

अलग-अलग सदनों में रहा लंबा राजनीतिक सफर
इन नेताओं का राजनीतिक सफर अलग-अलग सदनों से होकर गुजरा है। अधिकांश नेताओं ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत विधानसभा से की थी।

इसके बाद वे लोकसभा और राज्यसभा तक पहुंचे। राजनीतिक अनुभव और जनाधार के आधार पर उन्हें अलग-अलग सदनों में प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला।

चारों सदनों में सदस्य रहने को एक बड़े राजनीतिक अनुभव के रूप में देखा जाता है। नीतीश कुमार भी लंबे समय से सक्रिय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।

लालू प्रसाद ने लोकसभा से की थी शुरुआत
चारों सदनों में रहने वाले नेताओं में लालू प्रसाद का सफर थोड़ा अलग रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत लोकसभा से की थी।

साल 1977 में वे पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए थे। इसके बाद वे बिहार की राजनीति में सक्रिय हुए। बाद में वे विधानसभा और राज्यसभा के सदस्य भी बने। इस तरह उन्होंने चारों सदनों में प्रतिनिधित्व किया।

उपेंद्र कुशवाहा तीसरी बार जाएंगे राज्यसभा
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा का भी लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है। वे पहले भी लोकसभा, विधानसभा और राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं।

अब वे तीसरी बार राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं। उनका नाम भी उन नेताओं में शामिल है जिन्होंने चारों सदनों का अनुभव हासिल किया है।

बिहार की राजनीति में ऐसे नेताओं की संख्या बहुत कम है। इसी वजह से यह उपलब्धि राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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