रिपोर्ट:कार्यालय ब्यूरो।
महाराजगंज। उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग में इन दिनों सरकारी नियम-कायदे शायद फाइलों में दबकर ‘सिंचाई’ का इंतजार कर रहे हैं। मामला महाराजगंज का है, जहाँ अधिशासी अभियंता राजीव कपिल की कार्यशैली और उनके कुछ ‘खास’ सिपहसालारों की अटूट निष्ठा चर्चा का विषय बनी हुई है। आलम यह है कि विभाग में नियमों की बलि चढ़ाकर ‘खास’ चेहरों को वो संरक्षण मिल रहा है, जो शायद लुप्तप्राय प्रजातियों को भी मयस्सर न हो।
*तबादला कागजों पर, दिल तो महाराजगंज में है!*
विभाग के गलियारों में सबसे तीखा कटाक्ष रविंद्र यादव और कौशल श्रीवास्तव को लेकर है। चर्चा है कि इन दोनों साहबान पर अधिशासी अभियंता की ‘कृपा दृष्टि’ इतनी अपार है कि सरकारी स्थानांतरण नीति भी इनके आगे पानी भरती नजर आ रही है।
> सुना है कि तबादला होने के बाद भी रविंद्र यादव जी का मोह महराजगंज की मिट्टी (या शायद यहाँ के ‘मलाईदार’ काम) से छूट नहीं रहा है। नियम कहते हैं कि बोरिया-बिस्तर समेटकर नई तैनाती पर जाइए, लेकिन यहाँ तो ‘साहब’ और ‘खास’ के बीच ऐसा अटूट रिश्ता है कि नियम खुद शरमा कर कोने में दुबक गए हैं।
*मलाई का मोह और अनदेखी का खेल।*
सूत्रों की मानें तो रविंद्र यादव, जिन्हें अधिशासी अभियंता का दाहिना हाथ माना जाता है, लंबे समय से जिले में जड़ें जमाए बैठे हैं। उन पर अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगते रहे हैं, लेकिन मजाल है कि कोई जांच उनकी परछाईं को भी छू सके। आखिर जब रक्षक ही ‘विशेष निकटता’ के कवच में हों, तो भक्षक का डर कैसा।कौशल श्रीवास्तव और रविंद्र यादव की इस ‘जुगलबंदी’ ने विभागीय व्यवस्था को एक निजी जागीर में तब्दील कर दिया है। सवाल यह है कि क्या महाराजगंज सिंचाई विभाग में पदों पर नियुक्ति योग्यता के आधार पर होती है या फिर ‘जी-हुजूरी’ और ‘खास पसंद’ के पैमाने पर।
*मंत्री जी की शुचिता को चुनौती।*
गौरतलब है कि यह विभाग जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के अधीन आता है, जो अपनी ईमानदारी और सख्त अनुशासन के लिए जाने जाते हैं। लेकिन महराजगंज के ये हालात उनकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को ठेंगा दिखा रहे हैं।बड़ा सवाल यह कि क्या अधिशासी अभियंता राजीव कपिल शासन के आदेशों से ऊपर हैं,स्थानांतरण के बावजूद आखिर किस ‘अदृश्य शक्ति’ के सहारे रविंद्र यादव जिले में जमे हुए हैं,क्या विभाग में काम करने के लिए कुशलता से ज्यादा ‘विशेष संरक्षण’ की डिग्री अनिवार्य हो गई है।
*कार्रवाई या सिर्फ कागजी खानापूर्ति।*
फिलहाल महराजगंज सिंचाई विभाग की यह ‘प्रेम कहानी’ (अधिकारियों और उनके करीबियों के बीच) चर्चा का केंद्र है। अब देखना यह है कि इस खबर के बाद शासन की नींद टूटती है या फिर ‘मलाईदार’ पदों का यह खेल इसी तरह निर्बाध चलता रहेगा। जनता और विभाग के ईमानदार कर्मचारी अब स्पष्टीकरण नहीं, बल्कि सख्त कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं।



































