छत्तीसगढ़ की राजनीति में खलबली: पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने पीएम मोदी से की PWD अभियंता की शिकायत, केंद्रीय जांच की मांग

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दिल्ली/रायपुर, 14 फरवरी 2026

छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार होने के बावजूद, पार्टी के ही एक वरिष्ठ नेता को अपनी ही सरकार के एक विभाग की शिकायत लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास जाना पड़ा है। अपनी स्पष्टवादिता और बेदाग छवि के लिए पहचाने जाने वाले, छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री और वरिष्ठ आदिवासी नेता ननकीराम कंवर ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रमुख अभियंता विजय कुमार भतपहरी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर भतपहरी के खिलाफ केंद्रीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता ननकी राम कंवर ने प्रधानमंत्री से की शिकायत, लोक निर्माण विभाग के अभियंता की जांच की मांग
दिल्ली/14/02/2026

छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता ननकी राम कंवर ने प्रधानमंत्री से लोक निर्माण विभाग के अभियंता की शिकायत करके जांच की मांग की। आश्चर्य इस बात का है छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार है इसके बावजूद प्रदेश के वरिष्ठ नेता को अपनी बात पत्र के जरिए प्रधानमंत्री तक पहुंचाना पड़ रही है। सवाल यह है कि विष्णुदेव साय की सरकार अपने ही वरिष्ठ नेताओं की शिकायत को अनदेखा क्यों कर रही है।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में अपनी स्पष्टवादिता और बेदाग छवि के लिए पहचाने जाने वाले वरिष्ठ आदिवासी नेता एवं पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर ने लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता विजय कुमार भतपहरी के खिलाफ गंभीर आरोपों के साथ सीधी शिकायत शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाई है। कंवर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और लोक निर्माण मंत्री अरुण साव को पत्र लिखकर केंद्रीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
अपने विस्तृत पत्र में कंवर ने आरोप लगाया है कि संबंधित अधिकारी ने विभाग में विभिन्न पदों पर रहते हुए नियमों की अनदेखी कर चुनिंदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया, कथित रूप से कमीशनखोरी की और बेनामी व परिजनों के नाम पर चल-अचल संपत्तियां अर्जित कीं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो में वर्ष 2011 और 2015 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज हुए थे, लेकिन प्रभावशाली पहुंच के कारण उन मामलों में ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी और वे लंबित रह गए।
राजनांदगांव संभाग के मानपुर–संबलपुर मार्ग निर्माण का मुद्दा भी पत्र में प्रमुखता से उठाया गया है। आरोप है कि लगभग 6.95 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति के विरुद्ध करीब 10 करोड़ रुपये तक भुगतान कर दिया गया। शिकायत के बाद मुख्य तकनीकी परीक्षक (सतर्कता) की जांच में स्वीकृत राशि से अधिक व्यय और रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताओं की बात सामने आने का दावा किया गया है। इसके बावजूद कड़ी कार्रवाई न होने पर सवाल खड़े किए गए हैं।
इसी प्रकार बिलासपुर मंडल में एक निरस्त अनुबंध को पुनर्जीवित कर बिना दंड समयवृद्धि और एस्केलेशन की स्वीकृति दिए जाने का आरोप भी लगाया गया है, जिससे शासन को आर्थिक क्षति होने की बात कही गई है।
कंवर ने पदोन्नति प्रक्रिया पर भी प्रश्न उठाए हैं। उनका आरोप है कि लंबित शिकायतों और गंभीर आरोपों की पूरी जानकारी आयोग के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई, जिसके चलते विभाग के अन्य अभियंताओं में असंतोष और अविश्वास का वातावरण बना। उनका कहना है कि यदि गंभीर प्रकरणों के बावजूद अधिकारी उच्च पदों तक पहुंचते रहे, तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल है।
उन्होंने मांग की है कि संबंधित अधिकारी को तत्काल पद से हटाया जाए, लंबित मामलों की निष्पक्ष जांच केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए और यदि अनियमितताएं सिद्ध हों तो शासन को हुई क्षति की वसूली सुनिश्चित की जाए।
यह विवाद केवल एक अधिकारी पर लगे आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोक निर्माण विभाग की साख और शासन की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। सड़क, पुल और आधारभूत संरचना की गुणवत्ता सीधे सरकार की छवि से जुड़ी होती है। ऐसे में प्रमुख अभियंता स्तर पर गंभीर आरोप लंबित रहने से विपक्ष को हमला करने का अवसर मिलता है और जनता के मन में भी संशय उत्पन्न होता है। अब देखना यह है कि शासन इन आरोपों को राजनीतिक विवाद मानकर टालता है या पारदर्शी और समयबद्ध जांच के माध्यम से तथ्य सामने लाता है।

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