कोर्ट के आदेश पर भी लेखपाल ने मांगी रिश्वत, ऑडियो साक्ष्य मिलने पर एसडीएम ने किया निलंबित।*

83
Advertisement

*लेखपाल की मनमानी पर चला प्रशासन का डंडा; कुर्रा बनाने के नाम पर मांगे थे पैसे, अब हुए सस्पेंड।*

रिपोर्ट:हेमंत कुमार दुबे।

निचलौल/महराजगंज। न्यायालय के आदेश का अनुपालन करने के बदले रिश्वत की मांग करना एक लेखपाल को भारी पड़ गया। उपजिलाधिकारी (एसडीएम) सिद्धार्थ गुप्ता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए हल्का लेखपाल अंशुमान महतो को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। पीड़ित द्वारा प्रस्तुत ऑडियो रिकॉर्डिंग और प्राथमिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है।
आइये जानते हैं पूरा मामला,नगर पालिका परिषद सिसवा बाजार के सरदार पटेल नगर निवासी प्रमोद कुमार चौधरी ने एसडीएम को शिकायती पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई थी। प्रमोद के अनुसार, उनके बाबा रामधनी ने भूमि के खाता बंटवारे के लिए राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत तहसील न्यायालय में वाद दायर किया था। न्यायालय ने 30 सितंबर 2025 को लेखपाल को भूमि का कुर्राफाट और रंगभेदी नक्शा तैयार करने का आदेश दिया था।आरोप है कि जब पीड़ित 28 दिसंबर को लेखपाल से मिला, तो काम के बदले 4,000 रुपये की मांग की गई। आर्थिक तंगी के चलते प्रमोद ने 300 रुपये दिए और बाकी पैसे बाद में देने की बात कही। 9 जनवरी को जब वह दोबारा मिला, तो बाकी पैसे न दे पाने पर लेखपाल ने उसे अपमानित कर भगा दिया और काम करने से स्पष्ट मना कर दिया। पीड़ित ने लेखपाल के साथ हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग साक्ष्य के रूप में प्रशासन को सौंपी। शिकायत में यह भी बताया गया कि संबंधित लेखपाल लंबे समय से एक ही क्षेत्र में जमे हैं और अक्सर गरीबों का शोषण करते हैं।इस संदर्भ में उपजिलाधिकारी सिद्धार्थ गुप्ता ने कहा कि
> “शिकायत की गंभीरता को देखते हुए जांच कराई गई थी। प्रथम दृष्टया लेखपाल अंशुमान महतो पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप सही पाए गए हैं, जिसके आधार पर उन्हें निलंबित कर दिया गया है। मामले में विस्तृत विभागीय जांच के भी आदेश दिए गए हैं।”

यहां भी पढ़े:  ट्रंप और उनकी टीम ने बड़े पैमाने पर कारोबारियों से चंदा जुटाया……..बदले में किसी को माफी मिली, किसी का केस खत्म हुआ
Advertisement